डॉ. आरूषि गुप्ता
नैनीताल। जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मौसम में होने वाली त्वचा संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ज्यादा देर तक खुले हाथ-पांव पानी या नमी के संपर्क में रहने से चिल ब्लेन होने का खतरा रहता है। नैनीताल में साफ-सफाई में लापरवाही और संक्रमण के कारण फुंसी, एक्जीमा, खुजली, दाद आदि के मरीज बढ़ रहे हैं। ठंंड के चलते बीडी पांडे अस्पताल में त्वचा एलर्जी वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
बीडी पांडे अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ.आरुषि गुप्ता का कहना है कि ठंड के मौसम में कोशिकाओं में नमी कम होने से त्वचा सूखने और फटने लगती है। लापरवाही से त्वचा की ऊपरी सतह प्रभावित होकर धीरे-धीरे सूखने लगती है। ऐसे में त्वचा की परत बाहर निकलती है और गंदगी या संक्रमण के चलते त्वचा रोग हो जाते हैं। ठंड में खुजली की वजह से शरीर और हाथ की अंगुलियों में छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं। शरीर पर लाल चकत्ते हो जाते हैं। यह साफ-सफाई की कमी, गंदे कपड़े पहनने, नहाने के बाद शरीर को ठीक से न सुखाने से होता है। अधिक ठंड में ऐसी लापरवाही बार-बार करने से हाथ-पैर की अंगुलियों में चिल ब्लेन हो सकता है। इसमें ठंड से अंगुलियां नीली पड़ जाती हैं। दर्द और झनझनाहट होने लगती है। ठंडे पानी में हाथ डालने पर दिक्कत बढ़ जाती है।
कोल्ड क्रीम का प्रयोग करें : डॉ.आरुषि
डॉ. आरुषि गुप्ता ने बताया कि जाड़े में त्वचा को सूखने से बचाना चाहिए। इसके लिए कोल्ड क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है। चिल ब्लेन से बचने के लिए ठंड के दौरान पैरों में गर्म मोजे और हाथों में दस्ताने पहनने चाहिए। पानी का कोई भी काम करते समय गुनगुना पानी इस्तेमाल करना चाहिए। नियमित स्नान के साथ साफ-सफाई रखनी चाहिए। त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए हरी सब्जियां, मौसमी फल और पौष्टिक भोजन का सेवन करना चाहिए। परेशानी बढ़ने पर डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।