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नैनीताल हाईकोर्ट: एसएसबी महानिदेशक को तीन सप्ताह में अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी कर आदेश पारित करने के निर्देश

Wed, 28 Oct 2026 10:02 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने एसएसबी महानिदेशक को 30 जून 2025 की चार्जशीट से जुड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी कर तीन सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नैनीताल हाईकोर्ट ने 30 जून 2025 को महानिरीक्षक फ्रंटियर मुख्यालय एसएसबी रानीखेत की ओर से जारी चार्जशीट और 11 जुलाई 2025 को रिकॉर्ड ऑफ एविडेंस तैयार करने का आदेश दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद एसएसबी के महानिदेशक को निर्देश दिया है कि 30 जून 2025 को जारी चार्जशीट के संबंध में चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को पूरा करें और तीन सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार आदेश पारित करें।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार रानीखेत निवासी याचिकाकर्ता हरीश चंद्र सिंह बिष्ट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 30 जून 2025 को महानिरीक्षक फ्रंटियर मुख्यालय, एसएसबी, रानीखेत द्वारा जारी चार्जशीट और 11 जुलाई 2025 के उस आदेश को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत उनके खिलाफ रिकॉर्ड ऑफ एविडेंस तैयार करने का आदेश दिया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जब उनके कमांडेंट के पद पर पदोन्नति का समय आया, तो उन्हें रोकने के उद्देश्य से यह प्रेरित और झूठी चार्जशीट जारी की गई थी, जिसका उद्देश्य उनके प्रमोशन के अधिकार से वंचित करना था।

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याचिका में कहा कि प्रतिवादियों को इस चार्जशीट के आधार पर याचिकाकर्ता की करियर प्रगति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न डालने का निर्देश दिया जाए। कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया है कि तीन सप्ताह की अवधि के दौरान या जब तक प्रतिवादी महानिदेशक एसएसबी द्वारा अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाता तब तक वर्ष 2027 की रिक्ति वर्ष के लिए कमांडेंट कम्युनिकेशन के पद पर कोई अन्य पदोन्नति नहीं की जाएगी। चूंकि याचिकाकर्ता सबसे वरिष्ठ डिप्टी कमांडेंट कम्युनिकेशन हैं, इसलिए चल रही चयन प्रक्रिया में उनके क्लेम पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि, उनका परिणाम एक बंद लिफाफे में रखा जाएगा, जिसे तभी खोला जाएगा जब वह 30 जून 2025 की चार्जशीट से शुरू हुई अनुशासनात्मक कार्यवाही में पूरी तरह से दोषमुक्त पाए जाते हैं।

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