अब दक्षिण भारत का रक्त चंदन, मथुरा का कृष्ण वट और पांच हजार फिट की ऊंचाई वाले इलाकों में उगने वाले बांज के पेड़ देखने के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं है। वन अनुसंधान केंद्र जैव विविधता से भरपूर ‘ब्रिक्स वाटिका’ तैयार कर रहा है। इस वाटिका में विलुप्त की कगार पर पहुंची वनस्पतियों को भी संरक्षित किया जा रहा है।
उत्तराखंड जैव विविधता से भरपूर है। यहां पाई जाने वाली तरह-तरह की वनस्पतियां, वन्य जीव जैव विविधता को समृद्ध करते हैं। वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी ने जैव विविधता को समृद्ध और संजोने के मकसद से ब्रिक्स वाटिका तैयार की है।
वाटिका में प्रदेश ही नहीं देश में पाए जाने वाले तरह तरह के औषधीय, कारोबारी, पर्यावरणीय, भीषण गर्मी से बर्फ से लकदक क्षेत्रों में पनपने वाली वनस्पतियों की नर्सरी तैयार की जा रही है। अनुसंधान केंद्र का दावा है कि यह जैव विविधता के मामले में सूबे ही नहीं देश में की अनूठी वाटिका है।
ब्रिक्स वाटिका की वनस्पतियां
पर्वतीय मैदानी
बांज रक्त चंदन
सेब हींग
बुरांश बाई बिडिंग
तिमूर नागकेसर
अखरोट कमरख
किलमोड़ा कपूर
हिसालु कृष्णवट
घिंघारू चिरौंजी
रूईस बीजासाल
जिंगसिन च्यूरा
कालातेन्दु भद्राक्ष
खड़ीक शिकाकाई
गिनराई सलई, सिंदूर, अचलकार्ड
सेंटर अर्बोरेटम ब्रिक्स वाटिका में देश के एक छोर दक्षिण भारत से उत्तराखंड के पर्वतीय स्थानों की विलुप्त होने वाली प्रजातियों को लगाया गया है। जैव विविधता से भरपूर वाटिका में उत्साहित करने वाले परिणाम आए हैं।
-मदन सिंह बिष्ट, रेंज आफिसर, वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी