जब बिसात ही चुनाव की बिछी हो तो मोहरा किसी को भी बनाया जा सकता है और मोहरा कोई भी हो सकता है। नेता पुत्रों के लिए इसी बिसात पर अब फिलहाल ’खेल’ मोहरा है। खेल युवाओं को पसंद है और नेता पुत्रों की कोशिश युवाओं को अपने से जोड़ने की है।
लिहाजा, मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत फुटबॉल मैच कराने में जुटे रहे। अब वित्त मंत्री के बेटे सुमित ने तो एक कदम और आगे बढ़ा दिया। हाल यह हुआ कि जिला क्रिकेट संघ ने युवाओं के हाथ में गेंद और बल्ला पकड़ाने की बजाय उनको हॉफ मैराथन के नाम पर दौड़ा और दिया।
बताते हैं कि वीरेंद्र रावत के फुटबॉल आयोजन को खास भीड़ नहीं मिल पाई थी। शायद सुमित ने इसी से सबक लिया।
प्रदेश के कांग्रेस के आला नेताओं के बेटे खेल के बहाने युवाओं में मेल बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं। सीएम के बेटे वीरेंद्र रावत ने प्रदेश में पिछले माह फुटबाल मैच कराकर युवाओं को जोड़ने की रणनीति बनायी। इस खेल में भीड़ अपेक्षा से काफी कम आई।
देहरादून के बाद हल्द्वानी एफटीआई में सरकारी संसाधनों से फुटबाल मैच कराया गया। मैच में कुमाऊं के प्रत्येक जिलों की टीमों ने भाग लिया लेकिन खेल में आयोजन से नाराज ऊधमसिंह नगर सहित दो जिलों की टीमों ने विरोध जताया।
मुख्यमंत्री के ही बेटे आनंद रावत ने परंपरागत खेलों के बहाने युवाओं में पैठ बढ़ाने की कोशिश मेें जुटे हैं। आनंद अब कुमाऊंनी में क्विज कराने की तैयारी में हैं।
अब एक कदम आगे बढ़ते हुये वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश के पुत्र सुमित हृदयेश युवाओं का दिल जीतने की कोशिश में हैं। बस बात इतनी सी है कि सुमित ने युवाओं के हाथ में गेंद और बल्ला पकड़ाने की बजाय उन्हें दौड़ाना बेहतर समझा।
सुमित वैसे जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं और हॉफ मैराथन का आयोजन भी जिला क्रिकेट संघ ने ही किया। इसे कहते हैं नहले पर दहला। क्रि केट में कुछ ही खिलाड़ी जुट पाते, पर हाफ मैराथन में तो भाग लेने वाले कई हो सकते हैं। इसका नजारा दिखाई भी दिया।