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Coke Studio: उत्तराखंड के लोक गायक दिग्विजय सिंह को मिला बड़ा मंच, कोक स्टूडियो में बिखेरेंगे सुरों का जादू

Sat, 10 Feb 2024 03:04 PM IST
हीरा मेहरा चंद्रेश पांडे, संवाद

सार

Singer Digvijay Singh on Coke Studio: कोक स्टूडियो भारत सीजन-टू के लिए चयनित दिग्विजय सिंह पडियार नैनीताल जिले के निवासी हैं। दिग्विजय उत्तराखंड के लोक गीतों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना चाहते हैं। 
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Singer Digvijay Singh - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश भर में चर्चित लाइव म्यूजिक शो कोक स्टूडियो भारत सीजन-टू के लिए चयनित दिग्विजय सिंह पडियार (दिग-वी) नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लाॅक के निवासी हैं। बचपन से ही गायन के शौकीन दिग-वी फिल्मों में गायन के साथ साथ उत्तराखंड के लोक गीतों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना चाहते हैं। उनका कहना है कि कोक स्टूडियो में आयोजित उनका यह लाइव शो उनके इस सपने को जरूर पूरा करेगा।

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वर्तमान में मुंबई में रह रहे दिग-वी ने बृहस्पतिवार को अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि मूल रूप से वह ओखलकांडा ब्लाॅक के भीड़ापानी ग्रामसभा के तोक नरतोला के रहने वाले हैं। पिता किशन सिंह दिल्ली में नौकरी करते थे, लिहाजा बचपन से ही उनका परिवार गांव से दिल्ली चला गया। दिग-वी की प्रारंभिक शिक्षा गाजियाबाद से हुई और बाद में उन्होंने 2014 में करोड़ीमल काॅलेज से स्नातक उत्तीर्ण किया। वर्ष 2015 में वह अकेले ही अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई चले गए। मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें वर्ष 2016 में शंकर महादेवन की फिल्म राक आन टू से फिल्मों में गाने का मौका मिला और उसके बाद से अभी तक फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, कट्टी बट्टी, लाक आन टू, वेडिंग पुलाव समेत कई फिल्मों में न केवल गीतों को आवाज दे चुके हैं बल्कि फिल्मों के लिए कई गीत लिख भी चुके हैं। 

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उन्होंने बताया कि इस माह मुंबई के कोक स्टूडियो में होने वाले लाइव म्यूजिक शो में वह बागेश्वर जिले की लोक गायिका कमला देवी के साथ उत्तराखंड के लोक गीतों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएंगे। बताया कि उनका छोटा भाई अंकित सिंह भी उभरता हुआ गीतकार और कंपोजर है। वह भी कोक स्टूडियो में उनकी टीम के साथ है। बताया उनका और उनके परिवार का ओखलकांडा आना जाना लगा रहता है।  

मां से मिली गाने की प्रेरणा
दिग-वी ने बताया कि उनकी मां चंद्रा पडियार भी लोक गायिका हैं। बचपन से ही घर में मां से पहाड़ के लोक गीत सुनने को मिले और वहीं से उन्हें गायन की प्रेरणा मिली। बताया घर में गोपाल बाबू गोस्वामी के गीत खूब बजते थे। उन्होंने बताया कि लाॅक डाउन के दौरान उन्होंने एक बार रुकसार मोती गीत गाया जो खूब वायरल हुआ और यहीं से उनका लोक गीत गाने का सफर शुरू हुआ। 
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