दिव्यांग युवती भी कराएगी नामांकन
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कालाढूंगी (नैनीताल)। हल्द्वानी ब्लॉक के ग्राम डहरिया मुखानी निवासी सुमनलता कश्यप भी विधानसभा चुनाव में नामांकन करवाना चाहती हैं। 29 साल की उम्र तक न जाने कितनी बार सुमनलता ने खुद को उपेक्षित महसूस किया। वह करीब 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं, मगर उन्होंने कभी इस दिव्यांगता को अपने जज्बे और अपनी जिंदगी पर हावी नहीं होने दिया। इसलिए अब वह राजनेताओं को आइना दिखाना चाहती हैं। सुमनलता ने पिछले 15 साल से संघर्षों को बहुत करीब से जिया है, जाना है। इन 15 साल में खुद को घरवालों के ऊपर एक बोझ न बनाते हुए स्वरोजगार तो किया ही, दूसरों को भी रोजगार से जोड़ा।
उनके संघर्ष की कहानी लंबी है। दिव्यांग महिलाओं के लिए कुछ करने की आस में एक व्हील चेयर के सहारे चलने वाली सुमनलता को सरकारी योजनाओं की फाइलों ने खूब छकाया लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि अपने जज्बे पर कायम रहते हुए सुमनलता पिछले 10 वर्षों से कई बेसहारा लोगों के लिए जी रही हैं। वह सिलाई, कढ़ाई, बुनाई सिखा रही हैं। इंटरमीडिएट पास सुमनलता शुक्रवार को अपने कुछ पारिवारिक सदस्यों और समर्थकों के साथ विधानसभा चुनाव का पर्चा खरीदने तहसील पहुंची थी। इस दौरान सुमनलता ने कहा कि दिव्यांग महिलाओं के लिए सुविधाओं का अभाव है।
ऐसा नहीं है कि सरकार की तरफ से योजनाएं नहीं हैं, मगर उनका लाभ जरूरतमंद तक नहीं पहुंच पाता। इतने साल काम करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि जनप्रतिनिधि बनने के लिए उनके अंदर पूरी क्षमता है। वह चाहती हैं कि हर जनप्रतिनिधि उन जैसी महिलाओं, दिव्यांगों के लिए बनाई गई योजनाओं को साकार करे। उनका जज्बा चुनाव जीतकर विधानसभा तक पहुंचने का है और मकसद राजनेताओं को आइना दिखाना। जज्बा तो है ही, कुछ लोगों का साथ भी और उम्मीद उन लोगों के साथ की, जो इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहते हैं। सुमनलता कहती हैं कि चुनाव से मेरा सरोकार कम रहा लेकिन मुझ जैसी महिलाओं का अपने हक के लिए चुना जाना जरूरी है।