हल्द्वानी। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2023 तक शारदा में खनन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृ ति दे दी है। वहीं, वन निगम कुमाऊं की अन्य नदियों गौला, कोसी और दाबका के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने की कोशिश में जुटा है। इसमें गौला से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया गया है। अब मंत्रालय के साथ बैठक होनी ही शेष है।
नदियों में खनन के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से दो स्तर पर फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन भूमि हस्तांतरण) और एनवायरमेंट क्लीयरेंस (पर्यावरणीय स्वीकृति) की जरूरत होती है। इन दोनों की अनुमति होने पर ही खनन किया जा सकता है। कुमाऊं में सबसे बड़ा खनन कार्य जिन नदियों में होता है, उसमें शारदा भी है। शारदा में लगभग 380 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खनन होता है। इस नदी के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति अप्रैल 2021 अप्रैल में खत्म हो रही है, जबकि फॉरेस्ट क्लीयरेंस 2023 तक है। ऐसे में वन निगम पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने में जुटा था। इसी सिलसिले में वन निगम और मंत्रालय के अधिकारियों के बीच वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक हुई थी। इसमें वन निगम की तरफ से महाप्रबंधक डॉ. विवेक पांडे शामिल हुए। वन निगम के एमडी मोनिष मल्लिक ने बताया कि शारदा नदी में खनन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति मिल गई है।
अन्य नदियों में अनुमति प्राप्त करने की कोशिश
हल्द्वानी। कुमाऊं में कोसी, शारदा, दाबका, गौला, नंधौर में खनन होता है, इससे राजस्व प्राप्ति होने के साथ बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। ऐसे में खनन को लेकर कोई दिक्कत न आए, इसकी कोशिश में वन निगम जुटा है। इसी के तहत गौला, कोसी, दाबका के लिए भी पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने की योजना है, इन नदियों में पर्यावरणीय स्वीकृति अप्रैल- 2021 में खत्म हो रही है। गौला नदी के लिए आवेदन हो चुका है, अब मंत्रालय के साथ वन निगम अधिकारियों की बैठक होना बाकी है, जिसमें अनुमति संबंधी फैसला होगा।