गौलापार स्टेडियम में तरणताल का निरीक्षण करते चैंपियनशिप डायरेक्टर
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गौलापार स्टेडियम में 38वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारियां तेज हो गईं हैं। बृहस्पतिवार को स्वीमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के चैंपियन डायरेक्टर कमलेश नानावती ने तरणताल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय खेलाें के लिए तरणताल को अपडेट करने के निर्देश दिए। बताया कि तैराकी प्रतियोगिता फरवरी के पहले सप्ताह में होनी है। इसके लिए पानी का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तय रहेगा। इसके लिए पूल के हीटर की व्यवस्था की जाएगी।
कमलेश नानावती ने वाटरपोलो, डाइविंग, तैराकी आदि के लिए पूल में व्यवस्थाएं देखीं। उन्होंने पूल के फिल्टर प्लांट, हीटिंग व्यवस्था, सिटिंग व्यवस्था समेत कई चीजों को प्रमुखता से जाना। उन्होंने बताया कि 50 मीटर के पूल के दोनों तरफ नए ब्लॉक लगेंगे। सामान्य ब्लॉक की जगह ट्रेक ब्लॉक लगेंगे। इससे खिलाड़ियों को जंप करते समय थोड़ी रफ्तार मिलेगी। 50 मीटर और रिले प्रतियोगिता के लिए दोनों तरफ ट्रेक ब्लॉक लगेंगे। इसके अलावा डाइविंग के लिए बोर्ड बदले जाएंगे। इसकी जगह जापानी कंपनी ड्यूराफ्लैस के बोर्ड प्रयोग किए जाएंगे। वहीं टाइमिंग पाने के लिए पानी के अंदर दोनों तरफ टच पैड लगाए जाएंगे। ताकि एक-एक सेकंड की सही माॅनिटरिंग हो। तैराकी प्रतियोगिता में पूरे देश से 400 खिलाड़ी भाग लेंगे। निरीक्षण के दौरान एसएफआई के संयुक्त सचिव राजकुमार, सीमा मल्होत्रा, राज्य ओलंपिक संघ के महासचिव डीके सिंह, उप निदेशक रसिका सिद्दकी आदि मौजूद रहे।
वाटर पोलो और डाइविंग के लिए बनेगी अस्थायी दीवार
वर्तमान में वाटर पोलो और डाइविंग पूल एक साथ ही हैं। राष्ट्रीय खेलों के लिए दोनों पूलों के बीच अस्थायी दीवार बनाई जाएगी। चैंपियनशिप डायरेक्टर कमलेश नानावती ने बताया कि दोनों खेल एक साथ होंगे। सीटी बजाना, शोर होना समेत कई गतिविधियां होती हैं। खिलाड़ियों का ध्यान भंग न हो, इसके लिए दीवार जरूरी है।
शहर आएंगे दिग्गज तैराक
राष्ट्रीय खेलों में होने वाली तैराकी प्रतियोगिता में देशभर के दिग्गज तैराक भाग लेंगे। इसमें कुशाग्र रावत, श्री हरि नटराज, माना पटेल आदि शामिल हैं। इन्होंने ओलंपिक में भाग लिया है।
हल्द्वानी में जागी अंतरराष्ट्रीय खेल की संभावना
चैंपियनशिप डायरेक्टर कमलेश नानावती ने बताया कि स्पोर्ट्स का पूल अच्छा है। कुछ उपकरण लगने के बाद यह पूल अंतरराष्ट्रीय खेलाें के लिए तैयार हो जाएगा। पहले मैं उत्तराखंड में खेल कराना संभव नहीं समझता था। लेकिन अब काफी कुछ बदल रहा है। खेलों को बढ़ावा मिल रहा है।