हल्द्वानी। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि धर्म निरपेक्षता का कुछ अर्थ नहीं है। धर्मनिरपेक्षता पागलपन है। यह कोई व्यक्ति या वस्तु भी हो सकता है। जब तब किसी वस्तु, व्यक्ति में गुण, धर्म की प्रतिष्ठा है तब तक उसकी उपयोगिता है। धर्मनिरपेक्ष केवल शब्द है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम तंत्र, कम्यूनिस्ट और ईसाई तंत्र हिंदुओं की अपेक्षा प्रबल है। हिंदुओं में बिखराव है, उन्हें एकजुट होना पड़ेगा।
चारधाम मंदिर फतेहपुर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सबके पूर्वज सनातनी हिंदू आर्य हैं। सुसंस्कृत, सुशिक्षित, सुरक्षित संपन्न सेवा परायण, स्वस्थ समाज की संरचना हिंदुत्व की परख है। अन्य के हितों का ध्यान रखते हुए हिंदुत्व के अस्तित्व, देश की सुरक्षा, अखंडता के लिए कटिबद्धता हिंदुओं का दायित्व है।
लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सबके मूल में ब्रह्मा और ब्रह्मा के मूल में नारायण हैं। हर व्यक्ति की जीविका सुरक्षित हो इसका नाम हिंदुत्व है। पूर्वजों को सनातनी हिंदू समझना यह हिंदुत्व है।
शंकराचार्य ने कहा कि विकास की गलत परिभाषा की गई है। विकास के नाम पर स्मार्ट सिटी के बाद अब स्प्रिचुअल सिटी का नाम दिया जा रहा है। गांव खाली हो रहे हैं, महानगरों में दबाव है। ऐसे में शुद्ध हवा, शुद्ध भोजन, शुद्ध आकाश सुलभ नहीं होगा। विकास को परिभाषित करने की जरूरत है।
उत्तराखंड में पलायन के कारण चीन अंदर तक घुसा
हल्द्वानी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पलायन के कारण ही चीन अंदर तक घुस गया है। नीति निर्धारकों को यह समझना होगा और नीति स्पष्ट करनी होगी। उन्होंने कहा कि भारत को अमेरिका न बनाएं। भविष्य में भयंकर बीमारियां होंगी तब कोई विधा काम में नहीं आएगी।
संस्कृति और संस्कार ही भारत की पहचान
हल्द्वानी। एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि भारत की पहचान बनाए रखें। विदेश के लोग भी भारत की संस्कृति से प्रभावित हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री ने तब अपनी बहन को रूस में राजदूत बनाकर भेजा था। रूस के राष्ट्रपति ने यह कहते हुए उनसे बात करने से इंकार कर दिया कि भारत के प्रधानमंत्री की ऐसी बहन से वह बात करना पसंद नहीं करते जिनके अंग्रेजी कट बाल हों। तब डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन को राजदूत बनाकर रूस भेजा गया था।
मठ, मंदिरों का उपयोग समाज को सही दिशा देने में हो
हल्द्वानी। शंकराचार्य ने आह्वान किया कि हिंदू परिवार रुपये को क्षेत्र में शिक्षा, समाज को जाग्रत करने में लगाएं। आसपास मठ, मंदिरों का उपयोग समाज को सही दिशा देने में हो। उन्होंने कहा कि खुद के विवेक से अच्छे गुरु की पहचान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने कल्याण का मार्ग स्वयं प्रशस्त कर सकता है। जीवन को परमात्मा की प्राप्ति के लिए ढालना चाहिए। संयम, उपासना से आयु पर विजय प्राप्त की जा सकती है। भौतिक सुख परमात्मा का मार्ग प्रशस्त नहीं करता।
भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं आईएएस और आईपीएस का प्रशिक्षण
हल्द्वानी। शंकराचार्य ने कहा कि देश का संचालन करने वाले आईएएस और आईपीएस हैं लेकिन उनका प्रशिक्षण भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है। स्वतंत्र भारत में भी आईएएस और आइपीएस का प्रशिक्षण इस तरह से नहीं हुआ कि वह राष्ट्र के काम आ सकें।
ये रहे मौजूद
कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत, प्रदेश महामंत्री सुरेश भट्ट, भाजपा नेता सुरेश तिवारी, मनोज पाठक, मोहन पाठक, चार धाम मंदिर समिति अध्यक्ष जमन सिंह निगलटिया, गोपाल पडलिया आदि।