हल्द्वानी। हाथरस में बिटिया से हुई बर्बरता के खिलाफ सफाई कर्मचारियों ने शनिवार को कार्य बहिष्कार कर रैली निकाली और यूपी के मुख्यमंत्री का पुतला फुंका। सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में प्रदर्शन कर 20 मिनट सड़क पर जाम भी लगाया। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भी भेजा। उधर, प्रशासन ने पार्षद सहित 24 लोगों पर जाम लगाने और सामाजिक दूरी का पालन न करने का मुकदमा दर्ज किया है।
सफाई कर्मचारी और वाल्मीकि समाज के लोग देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के बैनर तले नगर निगम में एकत्र हुए। यहां हुई सभा में प्रदेश अध्यक्ष राहत मसीह ने आरोप लगाया कि यूपी सरकार आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोपियों को फांसी देने की मांग की। उधर, उत्तरांचल स्वच्छकार कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम अवतार राजौर, विनय पाल, सुनील चौधरी, अमन, राजेंद्र आदि ने भी कार्य बहिष्कार कर सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
पार्षदों ने भी दिया समर्थन
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और जुलूस में नगर निगम के कई पार्षद मौजूद रहे। पार्षद रोहित कुमार ने रैली की अगुवाई भी की। जाम लगाने में भी पार्षदों ने सफाई कर्मचारियों का साथ दिया। इस दौरान पार्षद रईस वारसी गुड्डु, तौफिक अहमद आदि लोग मौजूद रहे।
20 मिनट लगाया जाम
सफाई कर्मचारी सिटी मजिस्ट्रेट से बाहर आकर ज्ञापन लेने की मांग कर रहे थे लेकिन सिटी मजिस्ट्रेट ने पांच-छह कर्मचारियों से ही ज्ञापन लेने की बात कही। इससे सफाई कर्मचारी आक्रोशित हो गए। उन्होंने सड़क को 20 मिनट जाम कर दिया। साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने किसी तरह सफाई कर्मचारियों को सड़क से उठाया।
महंगा पड़ गया जाम लगाना
हल्द्वानी। भोटिया पड़ाव चौकी प्रभारी प्रताप सिंह नगरकोटी ने बताया कि सफाई कर्मचारी संगठन से जुड़े नेता राहत मसीह के नेतृत्व में काफी लोग नियमों का पालन करते हुए आंदोलन कर रहे थे लेकिन भीड़ के बीच पार्षद रोहित कुछ लोगों को लेकर सड़क पर जाम लगा दिया। हाईवे जाम करने पर पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वे मान नहीं रहे थे। रोड पर बगैर मास्क लगाए कुछ लोग दूरी का पालन नहीं कर रहे थे। इस मामले में पार्षद सहित नौ नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने धारा 147, 341, 269, 270,51 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। थानाप्रभारी संजय कुमार का कहना है कि कुछ लोगों ने यातायात बाधित कर आम लोगों को परेशान किया था। इस कारण ऐसे लोगों के खिलाफ विधिक कार्यवाही की गई है।