दुर्लभ सफेद बाघ की गर्जना अब प्रयोगशाला से गूंजेगी। रूस की सेंट पीटर्सबर्ग यूनिवर्सिटी दुनिया के सबसे रहस्यमयी और विलुप्तप्राय जीव सफेद बाघ का क्लोन बनाने जा रही है। इसके लिए उन्होंने उत्तराखंड के जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर से सहयोग मांगा है। अच्छी खबर यह है कि पंत विवि ने इस चुनौतीपूर्ण और ऐतिहासिक मिशन में सहयोग की हामी भर दी है। विवि के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने बताया कि इसी साल फरवरी में रूस के वैज्ञानिकों और छात्रों का एक दल पंतनगर आया था। यहां सफेद बाघ की क्लोनिंग पर विस्तार से विमर्श हुआ और तकनीकी सहयोग का रास्ता साफ हो गया।
ऐसे प्रयोगों के लिए डॉ. चौहान काफी अनुभवी हैं। इन्हीं की देखरेख में देश की पहली क्लोन गाय गंगा मार्च 2023 में जन्म ले चुकी है। इस वक्त बद्री नस्ल की गाय को बचाने के लिए भी क्लोनिंग प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।
क्लोनिंग की तकनीक रहस्यमय
इस मिशन में सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर तकनीक का इस्तेमाल होगा। इसमें किसी कोशिका का नाभिक निकालकर उसे अंडाणु में डाला जाता है और बिजली की सूक्ष्म तरंगों से भ्रूण को जीवन देने की कोशिश की जाती है। विज्ञान और प्रकृति का यह संगम जितना रोमांचक है, उतना ही संवेदनशील भी।
सफेद बाघ की दास्तां रीवा से रूस तक
भारत में सफेद बाघ की कहानी 1951 से शुरू होती है, जब रीवा (मध्य प्रदेश) के महाराजा मार्तंड सिंह ने पहला सफेद बाघ पकड़ा और उसका नाम रखा मोहन। तब से रीवा को व्हाइट टाइगर सिटी कहा जाने लगा। आज सफेद बाघ की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में चार से पांच करोड़ रुपये तक आंकी जाती है। यही वजह है कि रूस इस क्लोनिंग प्रोजेक्ट को आर्थिक और पर्यटन दृष्टि से बड़ा कदम मान रहा है।