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ज्योलीकोट में रोडवेज बस के ब्रेक फेल

Sun, 12 Apr 2015 02:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ज्याेलीकाेट
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उत्तराखंड रोडवेज प्रबंधन खटारा यात्री बसों से यात्रियों को मौत के सफर पर भेज रहा है। शनिवार को ऐसी ही एक खटारा बस के ज्योलीकोट में ब्रेक फेल हो गए। चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए बस को चट्टान से टकराकर रोक लिया। जिससे बड़ा हादसा बच गया। बस के सभी 38 यात्री सुरक्षित हैं। बस के चालक का आरोप है कि बस तकनीकी रूप से अनफिट है। उन्हें ऐसी बसें चलाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि विभागीय उच्चाधिकारी चालक की लापरवाही को वजह बता रहे हैं।
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अल्मोड़ा डिपो की बस (यूए 07एम-7196) शनिवार सुबह करीब साढ़े छह बजे अल्मोड़ा से टनकपुर के लिए रवाना हुई। करीब पौने दस बजे हल्द्वानी-नैनीताल एनएच पर होटल अर्स के पास आने पर इस बस के ब्रेक फेल हो गए। इस दौरान चालक ने विपरीत दिशा से बस को चट्टान से टकरा बस को रोक लिया। इससे बस में सवार चालक-परिचालक एवं दो विभागीय कर्मचारी सहित 34 यात्री सकुशल बच गए। दुर्घटना की सूचना पर ज्योलीकोट चौकी प्रभारी सतीश कापड़ी मौके पर पहुंचे।

हल्द्वानी निवासी चालक नंदा बल्लभ तिवारी ने बताया कि बस को अल्मोड़ा से टनकपुर लगभग 250 किमी लंबे रूट पर भेजा जा रहा है, जबकि नियमानुसार बस अपनी निर्धारित आयुसीमा पूरी कर चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यह बस 11 लाख किमी से अधिक चल चुकी है, जबकि बस को 10 लाख किमी की दूरी तय करने के बाद चलाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि बस के स्टेयरिंग, ब्रेक और प्रेशर पंप में लंबे समय से तकनीकी खराबी बनी हुई है।
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तिवारी के मुताबिक 10 अप्रैल को टनकपुर से वापसी के बाद उन्होंने बस को वर्कशाप में दाखिल किया, लेकिन कमियां दूर नहीं की गई। चालक का आरोप था कि उसे निलंबित करने एवं नौकरी से निकालने की धमकी देकर खटारा बस को ले जाने के लिए मजबूर किया गया। नियमों के विपरीत बस के ड्राइवर साइट में अगले टायर का रबड़ पूरी तरह से घिसा हुआ लगाया गया था।

वहीं, जब इस बारे में जब अल्मोड़ा डिपो के एआरएम क्रांति सिंह से फोन पर वार्ता की गई तो उन्होंने चालक तिवारी के आरोपों को निराधार बताया। कहा कि दुर्घटना चालक की ओर से वाहन चलाते वक्त मोबाइल पर वार्ता करने से हुई, जिसकी जानकारी उन्हें मोबाइल पर ही बस में सवार एक यात्री ने दी। हालांकि एआरएम से उक्त यात्री का मोबाइल नंबर नहीं दिया।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक अल्मोड़ा डिपो में लगभग 10 बसें खटारा हो चुकी हैं, जिनकी अब तक नीलामी तो नहीं की गई, लेकिन उन्हें धड़ल्ले से लंबी दूरी पर भेजा जा रहा है।
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