नैनीताल। हाइकोर्ट ने बागेश्वर में सरयू नदी में खनन कार्य के लिए उपयोग में लाई जा रही भारी मशीनों के संचालन पर रोक लगाते हुए सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार बागेश्वर निवासी प्रमोद कुमार मेहता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि एसडीएम बागेश्वर की ओर से बीती 9 मार्च को एक निविदा प्रकाशित की गई। इसमें स्थानीय व्यक्तियों-संस्थाओं को सरयू नदी के किनारे रेता उपखनिज के उठान हेतु खुली नीलामी के लिए आमंत्रित किया गया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि नीलामी की आड़ में जिला प्रशासन खनन माफिया को लाभ पहुंचा रहा है। बड़ी मशीनों जेसीबी, पोकलैंड से नदी के स्वरूप को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अभी तक सरयू नदी में मशीनों के बिना वार्षिक चुगान होता था। जिससे कभी भी आपदा या भू-कटाव की शिकायत नहीं हुई। याचिका में कहा कि खुली नीलामी 20 मार्च को हो चुकी है।
स्थानीय लोगों ने मामले में 13 मार्च को जिलाधिकारी बागेश्वर को प्रत्यावेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता का कहना था कि नीलामी पर रोक लगाने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा तथा नदी सुरक्षित रहेगी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भारी मशीनों के संचालन पर रोक लगाते हुए सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।