हल्द्वानी। शहर में अग्निशमन व्यवस्था की मौजूदा तस्वीर किसी सख्त चेतावनी से कम नहीं है, जहां तेजी से बदलते शहरी ढांचे, बढ़ती आबादी और लगातार ऊंची होती इमारतों के बीच दमकल विभाग अब भी पुराने, सीमित और कई मामलों में जर्जर संसाधनों के सहारे किसी तरह जिम्मेदारी निभाने की कोशिश कर रहा है। स्थिति यह है कि फायर स्टेशन में मौजूद दो वाटर टेंडर अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुके हैं। ऐसे में आपदा की घड़ी में इन वाहनों की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। बावजूद इसके विभाग इन्हीं बूढ़े वाहनों के सहारे शहर की सुरक्षा का दावा कर रहा है।
ऊंची इमारतों में आग लगी तो बचाव कैसे होगा
शहर में मॉल, कॉम्प्लेक्स, होटल और बहुमंजिला इमारतों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन फायर विभाग के पास आज तक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म या एरियल लैडर ट्रक जैसी आधुनिक व्यवस्था नहीं है। नतीजा यह है कि ऊंची इमारतों में आग लगने की स्थिति में दमकल कर्मियों को अब भी पारंपरिक सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है।
संसाधन कम, खतरा ज्यादा
शहर की सुरक्षा के नाम पर विभाग के पास केवल चार दमकल वाहन हैं जिनमें पानी और फोम टेंडर शामिल हैं। इसके अलावा एक मिनी हाई-प्रेशर यूनिट और एक छोटी फोम बुलेट उपलब्ध है। बढ़ते शहरी विस्तार और औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए ये संसाधन बेहद अपर्याप्त माने जा रहे हैं।
बड़ी आग लगे तो दूसरे जिलों की ओर देखना पड़ता है
हल्द्वानी का रिकॉर्ड बताता है कि जब भी बड़ा अग्निकांड हुआ तो विभाग को पड़ोसी जिलों से दमकल वाहन मंगाने पड़े। यानी शहर की अपनी व्यवस्था इतनी सक्षम नहीं कि वह बड़े हादसे से अकेले निपट सके।
शहर में 15 जगह लगे हैं फायर हाइड्रेंट
शहर में 15 स्थानों पर फायर हाइड्रेंट स्थापित हैं और उन्हें ट्यूबवेल से जोड़ा गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हाइड्रेंट लगा देने भर से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। आधुनिक उपकरण, पर्याप्त वाहन और प्रशिक्षित संसाधनों के बिना किसी बड़े अग्निकांड से निपटना बेहद मुश्किल हो सकता है।
दमकल विभाग की ओर से मुख्यालय को दो हजार लीटर की क्षमता वाले वाटर टेंडर, एक बैकपैक बुलेट और दो बड़े वाटर टेंडर्स की डिमांड की गई है। विभाग पूरी तरह सतर्कता बरत रहा है।
मिंदर सिंह, फायर स्टेशन अधिकारी हल्द्वानी