प्राकृतिक स्रोत के पानी को जानवरों के साथ ही इंसान भी खराब कर रहे हैं। गरमपानी के प्राकृतिक स्रोत के पानी की रिपोर्ट में मलमूत्र होने की बात सामने आई है। जबकि कोसी और दाबका नदी के पानी का हालत जस की तस है। राहत की बात ये है कि कैंचीधाम के स्रोत के पानी की रिपोर्ट ठीक आई है।
पिछले वर्ष भी गरमपानी और कैंची धाम के स्रोत के अलावा कोसी एवं दाबका के पानी को जांच के लिए भेजा गया था। कोसी और दाबका की रिपोर्ट खराब आई थी। दोनों नदियों के पानी में जानवरों का मलमूत्र मिला था। जबकि कैंचीधाम और गरमपानी के प्राकृतिक स्रोत के पानी की रिपोर्ट सबसे अच्छी थी।
दोनों स्रोत का पानी शुद्ध था और पीने योग्य था। लगभग दो माह पूर्व कैंची धाम और गरमपानी के प्राकृतिक स्रोत की रिपोर्ट खराब आई थी। स्रोत के पानी में जानवरों के अलावा इंसानों का मलमूत्र मिला था। पानी में मलमूत्र मिलने से पीलिया होने की संभावना अधिक रहती है।
सूत्रों की मानें तो गरमपानी और कैंचीधाम स्रोत के पानी का सैंपल दोबारा जांच के लिए भेजा गया था। जिसमें कैंचीधाम के स्रोत की रिपोर्ट ठीक आई है जबकि गरमपानी के स्रोत की रिपोर्ट में मलमूत्र पाया गया है। जानवरों के अलावा इंसान का मलमूत्र मिलना चिंता का विषय है। पानी में मलमूत्र होने से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एचके जोशी दोनों स्रोत के पानी के सैंपल की जांच दोबारा कराई जाएगी।