हल्द्वानी। नौ कुमाऊं बटालियन के पूर्व सैनिकों ने 1965 भारत-पाक युद्ध की 60वीं जयंती महाराजके दिवस के रूप में मनाई। इसी दिन सात सितंबर 1965 को जवानों ने सियालकोट सेक्टर के महाराजके क्षेत्र पर सफलतापूर्वक कब्जा जमाया था। इस दौरान वीर शहीदों को भी याद किया गया।
रविवार को मुखानी स्थित एक बैंक्वेट हाल में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सात सितंबर 1965 की रात में गोलाबारी और फायरिंग के बीच बहादुर कुमाऊं रेजिमेंट के जवान लक्ष्य की ओर बढ़े। मां कालिका माता के जयघोष के साथ भारतीय सेना के जवानों ने महाराज के क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया। इस ऐतिहासिक विजय में सात वीर सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी और 19 जवान घायल हुए थे। कार्यक्रम की शुरुआत में पूर्व सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर मेजर (सेनि.) कुंवर सिंह महर, कैप्टन (सेनि.) सतीश चंद्र पांडे, कैप्टन (सेनि.) राम सिंह राणा, कैप्टन (सेनि.) खुशाल सिंह रावल, कैप्टन (सेनि.) भगवत सिंह पटवाल, कैप्टन (सेनि.) खुशाल सिंह महर, सोबन सिंह भड़, टीकम सिंह महर, हरीश सिंह बिष्ट, हवलदार (सेनि.) आनंद बल्लभ, सूबेदार (सेनि.) पूरन सिंह मेहरा आदि मौजूद रहे।