संगठन का मुखिया होने के नाते पार्टी के भविष्य की चिंता करना मेरी जिम्मेदारी है। सरकार में सहयोगी पीडीएफ 2017 में किस पार्टी से चुनाव लड़ेगी, आलाकमान को उनके विधायकों से बात कर मंशा टटोलने का सुझाव दिया था। सरकार में साथ होने के बाद विधानसभा चुनाव में आमने-सामने आने से नुकसान उठाना पड़ेगा, साथ ही स्थानीय नेताओं की नाराजगी भी झेलनी पड़ेगी।
शुक्रवार को स्वराज आश्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उक्त बातें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कही। उन्होंने कहा कि सरकार का पौने दो साल का कार्यकाल शेष है। ऐसे में पीडीएफ कोटे के मंत्री अगला चुनाव कांग्रेस से लड़ेंगे या निर्दलीय या फिर दूसरी पार्टी से लड़ेंगे, इस पर जल्द फैसला होना चाहिए। केंद्रीय नेतृत्व को बात कर पीडीएफ के विधायकों की मंशा जानने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन और सरकार के बीच कोई मतभेद नहीं है। मुख्यमंत्री रावत से जिस दिन भी मतभेद होगा उस दिन राजनीति से संन्यास ले लूंगा।
उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री या प्रदेश अध्यक्ष में से एक के चुनाव लड़ने का भी सुझाव दिया था। सुझाव पर केंद्रीय नेतृत्व विचार करेगा। दोनों के चुनाव लड़ने से रणनीति और प्रचार पर असर पड़ता है। एक व्यक्ति चुनाव लड़ेगा तो दूसरा बेहतर मैनेजमेंट कर सकता है। ममता राकेश के मंत्री पद की दावेदारी को लेकर उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। मुख्यमंत्री को तय करना है कि उनका मंत्रिमंडल कितना बड़ा हो। उपाध्याय ने इशारों में इस बात का संकेत दिया कि किसान रैली के बाद मंत्रिमंडल में कुछ फेरबदल हो सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को दायित्व बांटने के साथ ही संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी।
चुनाव प्रबंधन करने वाले को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए : इंदिरा
हल्द्वानी। वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की बात का समर्थन करते हुए कहा कि चुनाव प्रबंधन करने वाले को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा फार्मूला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कभी दिया था। प्रबंधन करने वाले के चुनाव लड़ने से प्रबंधन पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि किशोर उपाध्याय ताकतवर प्रदेश अध्यक्ष है और टिकट का बंटवारा भी वही करेंगे। उपाध्याय जहां से चाहेंगे चुनाव लड़ सकते हैं।