मात्र 23 साल की उम्र में पहाड़ों की पीड़ा संजोये मुनस्यारी के शुभम धर्मसत्तू साइकिल से साढ़े पांच हजार किमी की यात्रा पर निकल पड़े।
साढ़े तीन हजार किमी की यात्रा कर मंगलवार को वे रामनगर पहुंचे। उन्होंने पहाड़ों से पलायन रोकने व पर्यावरण बचाने के लिए पयर्टन को बढ़ावा देने और स्थानीय उत्पादों के इस्तेमाल से संदेश दिया।
रामनगर वन प्रभाग के विश्राम गृह में उनका स्वागत किया गया। धर्मसत्तू ने बताया उन्होंने अरुणाचल से यात्रा शुरू की, जो साढ़े पांच हजार किमी का सफर तय करेंगे।
उनकी यात्रा के पड़ाव आसाम, भूटान, सिक्किम, मेघालय, हिमांचल, उत्तराखंड, लद्दाख हैं। हिमालयी क्षेत्र के बाद नेपाल होते हुए शुभम मंगलवार को रामनगर पहुंचे।
वह अपने साथ साइकिल में टेंट भी साथ रखे हुए हैं। उनकी यात्रा का खास पहलू यह है कि उन्होंने कभी पानी खरीदकर नहीं पिया।
पहाड़ो का ही पानी वे इस्तेमाल कर रहेे हैं। वे यहां से देहरादून के लिए रवाना हो गए। वहां से लद्दाख के लिए निकलेंगे। 20 जुलाई को यात्रा पूरी होगी।
बताया कि वह जिस शहर या गांव में जाते हैं वहां की संस्कृति को एकजुट कर वे जानकारियां फेसबुक पर अपडेट करते हैं। इसके साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देते हुए पर्यावरण को बचाने व पहाड़ से पलायन रोकने के लिये वह ये अभियान छेड़े हुए हैं।