यूजीसी मानव संसाधन विकास केंद्र कुमाऊं विवि में ‘21वीं सदी के भारत की चुुनौतियां’ विषय पर दो दिनी सेमिनार का रविवार को समापन हुआ। सेमिनार में आयोजित छह तकनीकी सत्र में शोधार्थियों की ओर से 47 शोध पत्र पेश किए गए।
डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में आयोजित सेेमिनार में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. एचएस धामी ने कहा कि आने वाले समय में धरती का संरक्षण बड़ी चुनौती होगी। भविष्य की पीढ़ी को इससंकट से बचाने के लिए अभी से प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि भारत को कमजोर कर रही गरीबी, आतंकवाद, नक्सलवाद पर नियंत्रण के लिए शिक्षा अहम माध्यम है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. जेके जोशी ने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के भूतपूर्व चेयरमैन ले. जनरल मोहन भंडारी ने कहा कि सुनियोजित योजना के साथ 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों को शिक्षण, वैचारिक, दार्शनिक और प्रशासनिक कौशल में प्रवीण होने की वकालत की। केंद्र निदेशक प्रो. बीएल साह ने शोधार्थियों के शोध पत्रों की सराहना की। इस मौके पर सहायक निदेशक डा. रितेश साह, डा. नागेंद्र शर्मा, अजय सिंह चौहान, सहायक कुलसचिव डा. डीएस कोटलिया, सोना दीक्षित, आदित्य, नीरज, राजेश पालीवाल, कुमार अमित, डा. एसके पांडे समेत यूके, यूपी, दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, आसाम, एमसी, पश्चिम बंगाल के प्रतिभागी मौजूद थे।