कुमाऊं विश्वविद्यालय डीएसबी परिसर के राजनीति शास्त्र विभाग के सहयोग से बृहस्पतिवार को हरमिटेज भवन में उत्तराखंड की राजनीति में उभरती नई प्रवृतियां विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला हुई।
कार्यशाला में वक्ताओं ने राजनेताओं द्वारा राज्य हित के बजाए स्वहित को बढ़ावा दिए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 16 साल बाद भी राज्य की दिशा व दशा के साथ ही पर्यावरणीय नीति न बन पाना बेहद चिंतनीय है।
मुख्य अतिथि संसदीय सचिव सरिता आर्या ने कहा कि सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में प्रदेश चहुंमुखी विकास कर रहा है। राज्य में दलबदल की राजनीति से जनता को नुकसान हो रहा है। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति व पर्यटन के साथ ही यहां के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर बल दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड को हर्बल स्टेट के रूप में विकसित किए जाने की सख्त जरूरत है। मुख्य वक्ता एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि श्रीनगर के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रशेखर सूद ने कहा कि उत्तराखंड में राजनीतिक जागृति का स्तर काफी ऊंचा है और यहां हमेशा राष्ट्रीय दलों का दबदबा रहा है।
यूकेडी ने राज्य निर्माण के लिए काफी प्रयास किया लेकिन यह दल सशक्त नेतृत्व नहीं दे सका। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 16 वर्षों में प्रदेश में स्वहित के लिए नेताओं में दल बदल को अधिक बढ़ावा दिया जो कि राज्य के विकास के लिए शुभ संकेत नहीं है। राजनीतिशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. मधुरेंद्र कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया।
कला संकायाध्यक्ष प्रो. भगवान सिंह बिष्ट ने उत्तराखंड के उभरते राजनीतिक आयामों को जानने के लिए राज्य की संस्कृति, सभ्यता, इतिहास-भूगोल, सामाजिक व आर्थिक विकास को जानने की जरूरत बताई।
इस मौके पर निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता, डॉ. मुन्नी पडलिया, प्रो. नीता बोरा शर्मा, प्रो. कल्पना एस अग्रहरि, प्रो. आरएस जलाल, प्रो. मानवेंद्र पाठक, कुमार राकेश, डॉ. कृष्ण कौशल साह, शान अख्तर, किशन लाल साह थे।