जीजीआईसी में बोरिंग फेल होने के बाद तल्लीताल क्षेत्र में पेयजल की समस्या खत्म होने की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है। बलियानाला की तलहटी से पानी नहीं मिलने के बाद अब विभाग को दूसरे विकल्प की ओर देखना होगा।
बलियानाला के नीचे कई दशकों से लगातार रिस रहे पानी के सदुपयोग की योजना के तहत तत्कालीन जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने जीजीआईसी में बोरिंग टेस्टिंग कराई गई। संस्था की ओर की गई बोरिंग में 200 मीटर नीचे पानी भी मिला। इसके बाद जल संस्थान ने जीजीआईसी से बोरिंग पाइप डालने, 50 हजार लीटर का टैंक, पंप हाउस निर्माण, राजभवन टैंक तक राइजिंग मेन आदि के कार्य के लिए 2.10 करोड़ रुपये का स्टीमेट तैयार किया। सिंचाई विभाग से मिली प्रथम किस्त की 50 लाख की धनराशि से जल संस्थान ने निविदा के बाद कार्य भी शुरू कर दिया। मार्च में शुरू हुए कार्य के बाद शीघ्र तल्लीताल क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराया जाना था लेकिन बार-बार सिल्ट आने और ड्रिल फेल होने के चलते जल संस्थान ने कार्य बंद कर दिया है।
विभाग की ओर से की गई बोरिंग में पानी नहीं मिला। बोरिंग में खर्च पैसे के अलावा शेष राशि सिंचाई विभाग को वापस करने के लिए उनसे पत्राचार किया जाना है।
-रमेश गर्ब्याल, अधिशासा अभियंता जल संस्थान
सिंचाई विभाग की ओर से जल संस्थान को कार्य की प्रगति के बाबत पत्राचार किया गया है। सूचना मिली है कि बोरिंग में पानी न मिलने पर कार्य बंद कर दिया गया है। जल संस्थान के जवाब के क्रम में दूसरी जगह सर्वे पर विचार किया जाएगा। बृजेंद्र कुमार ईई सिंचाई विभाग