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कहीं बगावत थामी तो कहीं बगावत को दे दी हवा

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Politics of Bagawat in Haldwani
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हल्द्वानी। कांग्रेस ने 11 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। एक बात तो स्पष्ट हो गई कि पार्टी ने लालकुआं विधानसभा सीट पर बगावत थाम कर डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया है तो कालाढूंगी सीट पर बगावत की चिंगारी सुलग सकती है।
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लालकुआं विधानसभा सीट से वर्ष 2012 में हरीश चंद्र दुर्गापाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। पीडीएफ में शामिल होने के बाद कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया था और कैबिनेट मंत्री रहे थे। दुर्गापाल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरेंद्र बोरा के बीच छत्तीस का आंकड़ा था। दुर्गापाल के कांग्रेस के एक कार्यक्रम में मंच पर बैठने का भी बोरा समेत अन्य ने विरोध किया था। वर्ष 2017 का चुनाव दुर्गापाल ने कांग्रेस से लड़ा और हार का मुंह देखना पड़ा। पिछले कुछ समय से दुर्गापाल और बोरा में तल्खी कुछ कम हुई थी, लेकिन मनभेद खत्म नहीं हुए थे। दोनों ही एक-दूसरे को टिकट मिलने पर निर्दलीय मैदान में कूद सकते थे।
लालकुआं विधानसभा सीट से पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल, हरेंद्र बोरा और संध्या डालाकोटी का नाम पैनल में भेजा गया था। आलाकमान को अंदेशा था कि दुर्गापाल या बोरा किसी को भी टिकट दिया जाता है तो बगावत हो सकती है। पार्टी ने पूर्व ब्लाक प्रमुख संध्या डालाकोटी को टिकट देकर बगावत को थामने का प्रयास किया ही साथ ही कुमाऊं से दो महिलाओं को टिकट देकर भी संदेश देने की कोशिश की। बता दें कि कांग्रेस की कद्दावर नेता रहीं डॉ. इंदिरा हृदयेश का स्वर्गवास हो चुका है जबकि महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्या भाजपा का दामन थाम चुकी हैं। ऐसे में लड़की हूं लड़ सकती हूं के नारे को चरितार्थ करने का काम कांग्रेस ने किया।
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कालाढूंगी विधानसभा से कांग्रेस ने अभी तक जीत का स्वाद नहीं चखा है। वर्ष 2012 और 2017 में कांग्रेस ने राष्ट्रीय सचिव रहे प्रकाश जोशी को मैदान में उतारा था मगर सफलता नहीं मिली। दोनों ही चुनाव में कांग्रेस को बगावत भी झेलनी पड़ी थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश शर्मा की पार्टी में वापसी के बाद एक गुट उनको पचा नहीं पा रहा था। कालाढूंगी में अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं था। विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस से महेश शर्मा, भोला दत्त भट्ट, दीप सती, संजय किरौला आदि दावेदार थे।
सूत्रों की मानें तो पैनल में सिर्फ महेश शर्मा और भोला दत्त भट्ट का नाम गया था। पार्टी को लग रहा था कि दोनों में से किसी को भी टिकट दिया तो भितरघात हो सकता है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में नेता प्रतिपक्ष रहीं स्वर्गीय डॉ. इंदिरा हृदयेश और कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने डॉ. महेंद्र पाल सिंह को नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट से टिकट देने की पैरवी आलाकमान के समक्ष की थी। हालांकि डॉ. सिंह ने भीमताल विधानसभा सीट से टिकट मांगा था। पूर्व सांसद निर्विवादित हैं और उनका किसी गुट से कोई लेनादेना नहीं है। सोमवार को जब टिकट का एलान हुआ तो कालाढूंगी सीट से पार्टी ने डॉ. महेंद्र पाल सिंह को मैदान में उतार दिया। डॉ. पाल को टिकट मिलने से अन्य दावेदारों की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। अपने भविष्य को देखते हुए अन्य दावेदार क्या गुल खिलाते हैं यह तो समय ही बताएगा।
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