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हल्द्वानी: एसटीएच में पीजी डॉक्टरों का ओपीडी बहिष्कार, पुलिस बुलानी पड़ी; ओपीडी काउंटर घेरा

Sun, 13 Sep 2026 11:00 AM IST
गायत्री जोशी अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी

सार

हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलनरत पीजी डॉक्टरों ने शनिवार को ओपीडी पर्ची काउंटर घेर लिया। सुबह करीब साढ़े सात बजे से चार घंटे तक चले विरोध के कारण मरीजों को पर्ची कटाने के लिए इंतजार करना पड़ा।
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हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल में ओपीडी बंद करके पंजीकरण काउंटर के पास धरना देते पीजी डॉक्टरों से उलझता मरीज । - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर पांच दिन से आंदोलनरत पीजी डॉक्टरों ने शनिवार को सुशीला तिवारी अस्पताल में ओपीडी पर्ची काउंटर घेरकर मरीजों को पर्ची कटाने से रोक दिया। सुबह से करीब चार घंटे तक चले विरोध के चलते दूरदराज से आए मरीज परेशान रहे और कई बिना इलाज लौट गए। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी।

पीजी डॉक्टर सुबह साढ़े सात बजे ओपीडी पर्ची काउंटर के पास धरने पर बैठ गए और कुछ देर के लिए दरवाजे बंद कर दिए। इससे मरीजों को पर्ची नहीं मिल सकी। अस्पताल प्रशासन के समझाने पर दरवाजे और काउंटर खोले गए, लेकिन इसके बाद डॉक्टरों ने काउंटर के बाहर चेन बनाकर मरीजों को पर्ची कटाने से रोकना शुरू कर दिया। डॉक्टर मरीजों से ओपीडी में नहीं दिखाने की अपील भी करते रहे।

कई बार समझाने के बाद भी जब डॉक्टर नहीं माने तो 10:30 बजे चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण जोशी फिर धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों को ओपीडी बाधित न करने को कहा और कर्मचारियों को बुलाकर पर्ची काउंटर खुलवाया। साथ ही सीनियर डॉक्टरों को अपने-अपने केबिन में जाकर मरीज देखने के निर्देश दिए। काउंटर खुलते ही मरीजों की कतार लग गई। मामला बढ़ता देख पुलिस अस्पताल पहुंची और चिकित्सा अधीक्षक से जानकारी ली।

करीब 11:15 बजे डॉक्टर काउंटर से हटे जिसके बाद मरीजों की पर्चियां बननी शुरू हुईं। बाद में पुलिस की मौजूदगी में चिकित्सा अधीक्षक के कक्ष में आंदोलनकारी डॉक्टरों के साथ करीब आधे घंटे वार्ता हुई। डॉक्टरों ने इसके बाद शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की बात कही। ओपीडी पर्ची काउंटर बाधित होने से कई मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कुछ मरीज बिना इलाज ही वापस लौट गए।अस्पताल में सुबह से ही बड़ी संख्या में मरीज पहुंच गए थे। पर्ची काउंटर बाधित रहने से कई मरीज बिना इलाज लौट गए। दूरस्थ पहाड़ी जिलों से आए मरीज काउंटर खुलने का इंतजार करते रहे। आंदोलन के चलते गायनी, बाल रोग और भर्ती रोग विभाग की ओपीडी प्रभावित रही और कुछ मरीजों के ऑपरेशन भी नहीं हो सके। हालांकि मेडिसिन, सर्जरी, टीएमटी, ईएनटी और इमरजेंसी में सीनियर डॉक्टरों ने मरीजों को देखा। आंदोलनकारी डॉक्टरों ने मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी।

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पुलिस की मौजूदगी में हुई वार्ता

11:20 बजे चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण जोशी और डॉ. शहजाद ने पुलिस की मौजूदगी में आंदोलनकारी डॉक्टरों को समझाया। उसके बाद पर्चियां बननी शुरू हुई और मरीजों को ओपीडी में दिखाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। 11:40 बजे पीजी डॉक्टर फिर पर्ची काउंटर के पास तीन बजे तक धरने पर बैठ गए।

इन विभागों में सबसे ज्यादा असर

आंदोलन का असर गायनी, बाल रोग और भर्ती रोग विभाग की ओपीडी पर पड़ा। कुछ मरीजों के ऑपरेशन भी नहीं हो सके। वहीं मेडिसिन, सर्जरी, टीएमटी, ईएनटी और इमरजेंसी में सीनियर डॉक्टरों ने मरीजों को देखा। मेडिसिन में मरीजों की भीड़ के कारण भारी दबाव बना रहा।

स्टाइपेंड बढ़ाने का मामला शासन स्तर पर लंबित है। एसटीएच में सुबह के समय अव्यवस्था की स्थिति रही। पीजी डॉक्टरों को समझाकर शांत किया गया। साथ ही उनको चेताया गया कि अगर सरकारी कार्य और इलाज में बाधक बने तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. अजय आर्या, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज

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