बागेश्वर। सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) नई दिल्ली के विशेषज्ञों ने आवाजाही के लिए बंद किए गए नगर के ऐतिहासिक झूलापुल का निरीक्षण किया। टीम ने झूलापुल की मरम्मत की आवश्यकता बताई है। इस काम में ढाई महीने का समय लगने की संभावना है। अबकी उत्तरायणी मेले में भी झूलापुल से आवागमन शुरू होने की संभावना नहीं है।
सीआरआरआई के विशेषज्ञ एसके वर्मा और राजू गोयल ने बृहस्पतिवार को अंग्रेजी काल में वर्ष 1913 में बने ऐतिहासिक झूलापुल का निरीक्षण किया। डीएम ने झूलापुल के लिए उत्पन्न खतरे को देखते हुए बीते 19 जुलाई को झूलापुल से आवाजाही पर रोक लगा दी थी। विशेषज्ञों ने एसडीएम मोनिका, लोनिवि के ईई धन सिंह कुटियाल की मौजूदगी में पुल का निरीक्षण किया।
विशेषज्ञों के मुताबिक पुल पर लगी लोहे की जंजीरों की हालत सही है। पुल के गार्डर आदि की मरम्मत की आवश्यकता है। निरीक्षण के बाद पुल की मरम्मत कराने का निर्णय लिया गया। गौरतलब है कि बीते वर्ष के उत्तरायणी मेले में भी सुरक्षा की दृष्टि से पुल पर आवाजाही रोकी गई थी। यह दूसरा मौका होगा जब उत्तरायणी मेले में झूलापुल से आवागमन नहीं होगा।
विशेषज्ञों ने झूलापुल की मरम्मत की आवश्यकता बताई है। मरम्मत के लिए डीपीआर बनाई जाएगी। मरम्मत के काम में करीब ढाई महीने का समय लगने का अंदेशा है। मरम्मत के बाद ही झूलापुल से आवाजाही शुरू कराई जाएगी। अनुराधा पाल, डीएम, बागेश्वर।