रामनगर (नैनीताल)। विश्व विख्यात कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) केे बाघ अब राजाजी नेशनल पार्क के बाघों का कुनबा बढ़ाएंगे। कार्बेट पार्क भ्रमण के दौरान रामनगर पहुंचे मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक दिग्विजय सिंह खाती ने बृहस्पतिवार को वन विश्राम गृह में पत्रकारों को यह जानकारी दी। बताया कि राजाजी पार्क के जंगलों से नेशनल हाइवे का काम चलने के कारण वह पूर्वी और पश्चिमी दो भागों में बंट चुका है। उसके एक भाग में बाघों की संख्या करीब 35 है जबकि दूसरे भाग में केवल दो बाघिन ही बची हैं।
राजाजी पार्क के संकटग्रस्त क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिये कार्बेट पार्क की मदद ली जाएगी। इसके चलते अब अगर कोई बाघ कार्बेट लैंडस्केप में आबादी के पास आतंक फैलाएगा तो ऐसे बाघों को रेस्क्यू कर सेना के हेलीकॉप्टर से राजाजी पार्क के जंगलों में छोड़ दिया जाएगा। ताकि वहां बाघों की संख्या बढ़ सके। ऐसे पांच बाघों के गले के सैटेलाइट रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। ताकि बाघों के विचरण की सही स्थिति को जीपीएस से देखा जा सके।
बताया कि बदरीनाथ के मदमहेश्वर और खतलिंग ग्लेशियर के क्षेत्रों में 11 हजार फुट की ऊंचाई पर भी बाघों की मौजूदगी बताई गई है। इसकी पुष्टि के लिए विशेषज्ञों की कार्यशाला शीघ्र होगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में कितने बाघ हो सकते हैं। बताया कि स्नो लैपर्ड के बचाव, वन्यजीव प्रबंधन के बारे में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला कजाकिस्तान में होगी, जिसमें स्नो लैपर्ड की मौजूदगी वाले 17 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
भारत के जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड में स्नो लैपर्ड पाए जाते हैं। इसलिए कजाकिस्तान की कार्यशाला में भारत भी शामिल रहेगा। इस दौरान उनके साथ निदेशक सुरेंद्र मेहरा, उपनिदेशक अमित वर्मा, डीएफओ नेहा वर्मा, पार्क वार्डन शिवराज चंद आदि थे।