उत्तराखंड के गांवों का विकास मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना मेरा गांव-मेरा धन से होगा। योजना के तहत केवल राज्य के पूंजीपति और प्रवासी उत्तराखंडी गांवों में जमीनें लेकर उस पर सरकारी इमारत बनाएंगे।
इन इमारतों को सरकार तीस वर्ष के लिए किराये पर लेगी। तीस वर्ष बाद संबंधित व्यक्ति या तो उसे बेच सकता है या सरकार को आगे भी लीज पर दे सकता है।
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार रंजीत सिंह रावत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि योजना के तहत व्यक्ति जिस विभाग की इमारत बनाना चाहता है, उसे उस विभाग में आवेदन करना होगा।
इसके बाद सरकार इमारत का एस्टीमेट और नक्शा बनाएगी। जिस तारीख से सरकार इमारत को किराये पर लेगी, उस तारीख से उस पर प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत ब्याज दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त इमारत की मेंटिनेंस के लिए सरकार वार्षिक ब्याज का छह प्रतिशत भुगतान करेगी। साथ ही, आपदा की परिस्थितियों में इमारत को नुकसान पहुंचाने पर उसका प्रीमियम भी सरकार करेगी।
उन्होंने कहा जो व्यक्ति इमारत बनाएगा, यदि वह चाहे तो उस इसका नाम अपने परिजनों, शुभचिंतकों के नाम पर भी रख सकते हैं।
यही वजह है कि खुद मुख्यमंत्री तक इस योजना के तहत अपने गांव के विकास के लिए डिग्री कालेज बनाने के लिए आवेदन कर चुके हैं। इस योजना के तहत विदेशों व महानगरों से आवेदन आने शुरू हो गए हैं।
यदि किसी प्रवासी पर पहाड़ में जमीन नहीं है तो वह दूसरे की जमीन लेकर उस पर निवेश कर सकता है। इसमें स्कूलों से लेकर अस्पताल, पंचायत घर, महाविद्यालय, इंजीनियरिंग कालेज आदि शामिल हैं।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश सचिव शिशुपाल सिंह रावत, पूर्व सांसद महेंद्र पाल, अंकित गोयल, महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट, पूर्व ब्लाक प्रमुख कृष्णा लटवाल, आनंद रावत, संजय डंगवाल, असलम सिददीकी, भुवन पांडे, विकास डंगवाल, डीपी सिंह, नीरज अग्रवाल, सचिन अग्रवाल आदि मौजूद थे।