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नाटक में दिखा विभाजन का दर्द

Mon, 17 Aug 2015 01:45 AM IST
ब्यूूराे, अमर उजाला, हल्द्वानी।
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स्वतंत्रता दिवस की शाम शाकुंतलम बैंक्वट हाल में ‘जिस लाहौर नइ देख्या ओ जम्याइ नइ’ नाटक का मंचन हुआ।  रतन की मां की मौत और मौलवी की शहादत ने लोगों को हर हाल में इंसानियत पर कायम रहने की सीख दी।
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डा. असगर वजाहत के उपन्यास पर आधारित नाटक ‘जिस लाहौर नइ देख्या ओ जम्याइ नइ’ में भारत-पाक विभाजन की कहानी है। विभाजन के दौरान हजारों लोगों ने शहादत दी और बेघर हुए।

नाटक के अनुसार रतन की मां बंटवारे के बाद लाहौर में ही रह जाती है। उसे अपने परिवार का पता नहीं चलता। रतन की मां और विस्थापित होकर लाहौर पहुंचे सिकंदर मिर्जा के परिवार का दर्द मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
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रतन की मां, हमीदा बेगम और सिकंदर मिर्जा उनकी लड़की तन्नो, मोहम्मद शाह, मौलवी, पहलवान और नासिर काजमी आदि पात्रों को अभिनय से कलाकारों ने जीवंत कर दिया। 

पंजाबी जन कल्याण समिति के सहयोग और निहारिका थियेटर आर्ट सोसाइटी द्वारा  आयोजित नाटक का निर्देशन अनिल सनवाल ने किया।

 नाटक का उद्घाटन मुख्य अतिथि वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने किया। इस दौरान शक्ति प्रसाद सकलानी की किताब पंजाबी समाज इतिहास से वर्तमान तक का विमोचन भी हुआ।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विधायक बंशीधर भगत थे। इस मौके पर डीएम दीपक रावत समेत प्रशासनिक अफसर, संस्था के अवनीश राजपाल, प्रदीप कक्कड़, योग क्वात्रा, शिखर आहूजा, पुनीत आदि मौजूद थे।
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