गर्मी बढ़ने से इंसान ही नहीं जानवर भी प्रभावित होने लगे हैं। पालतू जानवरों पर संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। कुत्तों में पार्वो वायरल का हमला हो गया है। विदेशी नस्ल के कुत्ते सर्वाधिक प्रभावित हैं। खासकर पिल्ले एक ही उल्टी-दस्त में दम तोड़ रहे हैं। पशु अस्पताल में रोजाना संक्रमण से पीड़ित दर्जनों कुत्ते इलाज के लिए लाए जा रहे हैं।
कुत्ता इंसान का सबसे वफादार जानवर है। कुत्ता पालना भी अब स्टेटस सिंबल बन गया है। अधिकतर लोगों ने विदेशी नस्ल के कुत्ते पाले हैं, जिनकी परवरिश काफी महंगी है। इन्हें ठंड और गर्मी भी अधिक लगती है। पारा चढ़ने के साथ विदेशी नस्ल के कुत्तों पर पार्वो वायरल का हमला हो गया है। राजकीय पशु अस्पताल के डाक्टर डीएस मर्तोलिया के मुताबिक आमतौर पर अप्रैल से जून तक कुत्तों में पार्वो वायरल का खतरा होता है। इसमें कुत्ते को तेज बुखार के साथ उल्टियां और खूनी दस्त होते हैं। छोटे पिल्ले इस वायरल के हमले को झेल नहीं पाते हैं, जबकि बड़े कुत्ते भी इलाज न होने पर मर जाते हैं। अस्पताल में रोजाना दर्जनों कुत्ते इलाज के लिए लाए जा रहे हैं। प्राइवेट पशु अस्पतालों में भी यही हाल है।
टीकाकरण है एकमात्र बचाव
डा.मर्तोलिया के मुताबिक टीकाकरण ही पार्वो वायरल का बचाव है। इस वायरल से बचाव को तीन टीके लगते हैं। पहला टीका पिल्ले को डेढ़ महीने, दूसरा ढाई महीने और तीसरा साढ़े तीन महीने में लगता है। टीके सरकारी अस्पताल में उपलब्ध हैं।