इलाज में लापरवाही एवं तीमारदारों के साथ अभद्रता के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले सुशीला तिवारी अस्पताल की कारगुजारियों पर उत्तराखंड ह्यूमन राइट कमीशन ने जांच बैठा दी है। यह जांच मुक्तेश्वर भटलिया निवासी एक बच्चे का अस्पताल में इलाज न किए जाने पर हो रही है। कमीशन ने सीडीओ को जांच अधिकारी नामित किया है। जांच रिपोर्ट आठ हफ्तों में कमीशन को भेजी जानी है।
भटेलिया सुनकिया निवासी चंदन सिंह बिष्ट के नौ साल के बेटे सागर सिंह को 13 जनवरी की दोपहर सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सागर के सिर में गंभीर चोट थी। डाक्टरों ने सागर का इलाज करने के बजाए उसी शाम उसे निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता गुरविंदर सिंह चड्डा ने तब अस्पताल के प्राचार्य डा. पुरोहित से वार्ता की, लेकिन सागर को अस्पताल में इलाज नहीं मिला।
सागर का कृष्णा अस्पताल में इलाज हुआ और एक लाख का बिल आया। सागर के परिजनों ने 45 हजार अस्पताल में जमा कराए, जबकि बाकी बिल अस्पताल ने छोड़ दिया। चड्डा ने इसकी शिकायत मानवाधिकार आयोग से की थी। आयोग ने सीडीओ को इसकी जांच सौंपी है। सीडीओ ललित मोहन रयाल के मुताबिक जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रशासन से उस दिन का रिकार्ड मांगा गया है। ड्यूटी डाक्टरों और स्टाफ के भी बयान लिए जाएंगे।