मालिकाना हक समेत चार सूत्री मांगों को लेकर नौ दिनों से चल रहा क्रमिक अनशन सोमवार को आमरण अनशन में बदल गया। सोमवार को हमारा उत्तराखंड मंच के संयोजक यशपाल आमरण अनशन पर बैठ गए।
उनको शहीद पार्क लखनपुर के अनशन स्थल पर भारी हुजूम के साथ लाया गया। उनके निवास स्थान से जुलूस की शक्ल में पंपापुरी भरतपुरी, दुर्गापुरी टेढ़ा रोड से होकर अनशन स्थल पर पहुंचा।
इससे पहले आक्रोशित लोगों ने लखनपुर में दस मिनट का सांकेतिक जाम लगाया। नारेबाजी के बीच यशपाल रावत आमरण अनशन पर बैठ गए। इससे पहले उपजिलाधिकारी परितोष वर्मा ने आंदोलनकारियों से आमरण अनशन को कुछ दिन टालने का आग्रह किया।
मंगलवार को डीएम दफ्तर में मांगों को लेकर विभिन्न विभागों की एक बैठक का हवाला देते हुए उसमें आने का निमंत्रण दिया। आंदोलनकारियों ने एसडीएम की अपील को ठुकरा दिया।
लोगों ने मंगलवार शाम तक इस मामले में ठोस निर्णय न होने पर उत्तराखंड सरकार का पुतला फूंकने का एलान किया। गणेश रावत के संचालन और केएस अधिकारी की अध्यक्षता में हुई आमसभा में नीलम गुप्ता, इंदिरा जोशी, मोहन सती, वाईपी देवरानी, भावना भट्ट, हरीश चंद्र सती, संजय डोर्बी, प्रणय श्रीवास्तव, ललित पांडेय, ललित घुघत्याल, पूरन पांडेय, कमला ढौंडियाल, धनेश्वरी घिल्डियाल, कमला रावत, खुशी रावत, ललित उप्रेती, हरप्रीत सिंह, राजू रावत आदि ने विचार रखे।
यशपाल रावत के अनशन के समर्थन में कई संगठनों जनप्रतिनिधि भी पहुंचे। इनमें उत्तराखंड आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप, प्रमुख संजय नेगी, परिवर्तन पार्टी के प्रभात ध्यानी, प्रधान संगठन के अध्यक्ष शेखर चंद्र, उप प्रमुख शशि देवी, यूकेडी के राकेश चौहान आदि थे।