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Nainital News: धान नहीं बिका, बेटी की शादी सिर पर... हताशा में मेहनत को लगा दी आग

Tue, 11 Nov 2025 01:05 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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18 दिनों से मंडी में पड़ी उपज नहीं बिकने से किसान परेशान
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15 दिन बाद है घर में समारोह, रुपयों के अभाव में टूटा सब्र

सुरेंद्र खुराना
किच्छा। मेहनतकश चंद्रपाल की आंखों में एक सपना था। वह अपनी बेटी की शादी को यादगार बनाना चाहते थे। खेत की हर पौध के साथ उन्होंने यही उम्मीद रोपी थी। छह महीने फसल को रोज पसीने से सींचा। यकीन था कि जब फसल कटेगी तो बेटी के हाथ पीले करने का अरमान पूरा हो जाएगा। सिस्टम के नियमों के फेर में उनका धान नहीं बिका तो हताशा की ज्वाला भड़क उठी। क्षोभ में डूबे चंद्रपाल ने खुद ही अपनी फसल को आग लगा दी। लोगों ने वक्त रहते उपज को जलने से पहले बुझा दिया।
दरऊ गांव के किसान चंद्रपाल पिछले एक महीने से रोज क्रय केंद्र के चक्कर लगा रहे थे। सिस्टम के नियमों के फेर में उनका धान नहीं बिका और बेटी की शादी पर संकट आ गया। हर दिन उन्हें एक ही जवाब मिलता कि लिमिट खत्म हो गई है और खरीद रुक गई है। घर लौटने पर परिवार के चेहरे पर सवाल होते कि शादी की तैयारी कब शुरू होगी और वह चुप रह जाते।
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सोमवार को चंद्रपाल के भीतर हताशा की ज्वाला भड़क गई। उनको लगा जैसे केंद्रों ने किस्मत की तरह अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं। जेब खाली थी। धान पड़ा था। समय तेजी से निकल रहा था। निराशा और लाचारी में डूबे चंद्रपाल ने अपने ही हाथों से पैदा किए धान के ढेर को आग लगा दी। उनकी आंखों से आंसू बहते रहे और उम्मीदें धुआं हो गईं। आसपास मौजूद किसानों ने किसी तरह आग बुझाई और उन्हें ढाढ़स बंधाने लगे।
घटना से गुस्साए दर्जनों किसानों ने बाद में एसडीएम कार्यालय पहुंचकर एसडीएम गौरव पांडे के सामने दर्द रखा। उनका कहना था कि क्रय केंद्र पर लगभग एक माह से धान लाए हैं। उनका धान खरीदा नहीं जा रहा है। एसडीएम से आश्वासन मिलने के बाद किसान लौट गए।

तौल के इंतजार में पड़ा है धान
यह दर्द सिर्फ चंद्रपाल का नहीं है। जिले के तमाम किसान इसी परेशानी से जूझ रहे हैं। खरीद बंद होने के कारण सैकड़ों क्विंटल धान मंडियों में पड़ा सड़ रहा है। किसान फरहाद खान बताते हैं कि केंद्र पर कांटा मात्र नौ दिन चला। प्रभारी ने लिमिट पूरी होने का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। गांव के अमजद खान, जुबैर खान, आदिल खान और अफसर अली खान जैसे किसान रोज मंडी पहुंचते हैं और शाम को निराश लौट आते हैं।

कोट:
दरऊ के किसान समस्या लेकर आए थे। इसकी जानकारी आरएफसी को दे दी है। जैसे ही केंद्र की लिमिट बढ़ेगी, धान तौल शुरू हो जाएगी। -गौरव पांडे, एसडीएम, किच्छा

कारगिल योद्धा भी धान बेचने के लिए जूझ रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
किच्छा। कारगिल युद्ध लड़ने वाले ग्राम पटेरी निवासी पूर्व सैनिक गुरनाम सिंह भी धान बेचने केे लिए संघर्ष कर रहे हैं। 20 दिन से गुरनाम रोजाना दोपहर का खाना लेकर घर से आते हैं और धान खरीद की उम्मीद में नवीन मंडी में केंद्र पर बैठते हैं। इसके बाद वे मायूस होकर घर लौट जाते हैं। लापरवाह सिस्टम की करनी सिर्फ गुरनाम ही नहीं बल्कि कई किसान भुगत रहे हैं।
गुरनाम सिंह ने बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में रहकर राजौरी में कारगिल की लड़ाई लड़ी थी। वे सियाचीन ग्लेशियर, जम्मू, उधमपुर आदि जगहों पर तैनात रहे हैं। उनके दोनों बेटे घर से दूर हैं और वे खेतीबाड़ी संभालते हैं। वे 20 दिनों से मंडी में 70 क्विंटल धान तुलवाने की आस में बैठे हैं।
वह कहते हैं कि क्रय केंद्र में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। पहले धान तौलने का आश्वासन मिला था. अब अधिकारी लिमिट खत्म होने की बात कहकर टालमटोल कर रहे हैं। वे लिमिट बढ़ने पर ही धान तौलने की बात कह रहे हैं। 20 दिन से धान की वजह से कई काम प्रभावित हुए हैं। गेहूं बुआई के लिए खेत भी तैयार नहीं हो पा रहा है।
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10 दिन तक केंद्र में पड़ा रहा धान, हताश होकर व्यापारी को बेचा
पंतनगर विवि के लीज होल्डर दिनेश मंडल का धान बेनी क्रय केंद्र पर 10 दिन तक पड़ा रहा। केंद्र प्रभारी ने लिमिट पूरी होने का हवाला देकर धान तौलने से इन्कार कर दिया। इससे निराश दिनेश में अपना 900 क्विंटल धान केंद्र से उठाकर व्यापारी को 1910 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच दिया। लीज होल्डर अनिल कुमार ने लिमिट बढ़ने की आस में खेत से धान कटाई नहीं की है।

किच्छा मंडी में पांच सौ क्विंटल धान पड़ा
किसान धान लेकर मंडी में आए हैं। 18 दिन से धान की खरीद नहीं हो पा रही है। किसानों के अनुसार किच्छा मंडी में पांच सौ क्विंटल धान पड़ा है।
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