कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के अंतर्गत रामगंगा नदी में घड़ियालों के संरक्षण पर वैज्ञानिक अध्ययन शुरू हो गया है। सीटीआर और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की टीम घड़ियालों की वर्तमान स्थिति, उनके आवास, जल गुणवत्ता, प्रजनन स्थलों और संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का आकलन कर रही है। अध्ययन के आधार पर भविष्य में घड़ियालों के संरक्षण रणनीति तैयार की जाएगी।
अतिसंकट ग्रस्त प्रजाति में आने वाले घड़ियाल कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की रामगंगा नदी में काफी संख्या में पाए जाते हैं। समय से साथ नदी और वातावरण में हो रहे बदलाव का घड़ियाल के रहन-सहन में असर देखने के लिए डब्ल्यूआईआई और सीटीआर की टीम ने ऑपरेशन घड़ियाल शुरू किया है। इस दौरान घड़ियालों की गणना ही नहीं, नर, मादा और शावकों का अलग-अलग विश्लेषण भी किया जाएगा। घड़ियालों के अंडे देने वाले स्थलों की पहचान कर उनकी सुरक्षा, बच्चों के जीवित रहने की दर और प्रजनन की सफलता का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
रामगंगा नदी की होगी मैपिंग
शोध टीम पूरी रामगंगा नदी की मैपिंग करेगी। यह देखा जाएगा कि जिन स्थानों पर पहले घड़ियाल पाए जाते थे, वे अब भी वहीं मौजूद हैं या उनके आवास में किसी प्रकार का बदलाव आया है। इसके अलावा नदी की जल गुणवत्ता, प्रवाह, रेतीले तटों और अन्य पारिस्थितिक परिस्थितियों का भी वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा।
शुरुआती शोध में पाए गए चार स्थान
इस शोध के शुरुआती अध्ययन में पता चला कि रामगंगा नदी में प्रमुख रूप से चार स्थानों पर घड़ियालों की मौजूदगी मिली है। इसमें क्रोकोडाइल प्वाइंट, चैंपियंस पूल, ढिकाला और बोक्साड़ हैं। इन स्थानों पर घड़ियालों की संख्या, उनकी गतिविधियों और आवास की स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। वर्ष 2024 में हुई घड़ियालों की गणना में 183 घड़ियालों की मौजूदगी दर्ज की गई थी।
बदलते मौसम और रामगंगा नदी में हुए बदलावों का घड़ियालों पर किस तरह का प्रभाव पड़ रहा है, इसे देखने के लिए डब्ल्यूआईआई और सीटीआर की ओर से ऑपरेशन घड़ियाल चलाया जा रहा है। अध्ययन के बाद घड़ियालों के संरक्षण की नीतियां बनाई जाएंगी। -डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर