अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सैंपल लेने का आरोप लगाते हुए नगर के एक व्यापारी ने खाद्य विभाग के अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजकर दस लाख का हर्जाना मांगा है। हर्जाना नहीं देने पर व्यापारी ने न्यायालय की शरण में जाने की धमकी दी है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ललित मोहन पांडे ने 9 सितंबर 2013 को नगर में गुटखा व्यवसायियों के प्रतिष्ठानों पर छापा मारकर पान मसाले के नमूने लिए थे। ज्वाला लाइन के व्यापारी एवं पान मसाला डिस्ट्रीब्यूटर हरिओम शर्मा के प्रतिष्ठान से अन्य दुकानदारों को गए एक ही कंपनी के पान मसाला की रिपोर्ट पाजिटिव आई, लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर की दुकान से लिए गए पान मसाला की लैब रिपोर्ट निगेटिव निकली, जिसके बाद खाद्य विभाग द्वारा व्यापारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया गया।
वहीं रिपोर्ट अलग-अलग आने पर व्यापारी की अपील पर सैंपल को व्यापारी के खर्चे पर पूना की रेफरल प्रयोगशाला भेजा गया तो पता चला कि पान मसाला में निकोटिन की मात्रा शून्य है। व्यापारी द्वारा सूचना अधिकार से मांगी गई जानकारी से पता चला कि कार्रवाई के दिन खाद्य विभाग की टीम रामनगर में छापा मारने के लिए अधिकृत नहीं थी, वरन टीम को जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा हल्द्वानी एवं लालकुआं में छापामारी के लिए अधिकृत किया गया था। साथ ही यह भी पता चला कि राज्य की जिस लैब में बैठकर राज्य खाद्य विश्लेषक सुदेश कुमार कौशिक राज्य के व्यापारियों को निगेटिव-पाजीटिव के प्रमाण पत्र बांट रहे थे, उसके लिए उनके पास कोई अनुभव नहीं था।
राज्य खाद्य विश्लेषक कार्यालय के लोकसूचना अधिकारी जेआर ध्यानी ने व्यापारी को 10 जून 2014 को उपलब्ध कराई सूचना में बताया कि लैब निरीक्षक को जल, दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों के केमिकल परीक्षण का ही अनुभव था। पान मसाला अथवा अन्य किसी प्रकार के खाद्य पदार्थ की जांच का उन्हें कोई अनुभव नहीं है। व्यापारी की शिकायत पर रुद्रपुर लैब के अधिकारी कौशिक को सरकार द्वारा हटाकर उनके मूल विभाग दुग्ध उत्पादक संघ अलवर राजस्थान भेज दिया गया, लेकिन खाद्य विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की।