ऐसा नहीं है कि बाघों की संख्या केवल कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में ही बढ़ रही हो। इससे सटे जंगलों व आसपास के इलाकों में भी बाघ देखे जा रहे हैं। सीतावनी रिज़र्व फाॅरेस्ट, रामनगर-हल्द्वानी मार्ग और मालधन क्षेत्र में बाघ रिपोर्ट होना अच्छा संकेत है।
कॉर्बेट लैंडस्केप में बाघों के रहने की जो आदर्श संख्या है, घनत्व के हिसाब से वह 175 से ज़्यादा नहीं है पर यहां 350 से ज्यादा बाघ मौजूद हैं। इससे इनके रहने का क्षेत्रफल सिकुड़ रहा है और इनके बीच आपसी संघर्ष भी बढ़ रहा है। ऐसे में जो ताकतवर है वो अंदर रहेगा और जो कमज़ोर है वह इलाके से भागेगा। कॉर्बेट से सटे हुए कई गांव और खत्ते हैं और ऐसे में इलाका छोड़कर भागे बाघ इन गांवों के आसपास अपनी सीमा बना लेते हैं और पालतू मवेशियों का शिकार करते हैं। कभी-कभी इंसान भी इनका शिकार बन जाते हैं।
मानव वन्यजीव संघर्ष ज्वलंत समस्या
मानव वन्यजीव संघर्ष एक ज्वलंत समस्या बन चुकी है। इसे कम करने के लिए बाघों की संख्या को नियंत्रित करना ज़रूरी है। शिकार, तस्करी के अलावा मानव वन्यजीव संघर्ष एक जटिल समस्या है। वासस्थल में सुधार, जंगल की आग से सुरक्षा, चारागाहों एवं प्राकृतिक जलस्रोत में वृद्धि, कॉरिडोर को और अधिक सुरक्षित करना होगा। स्थानीय समुदाय के सहयोग के बिना यह सब संभव नहीं है।
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मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए लिविंग विद लैपर्ड, लिविंग विद टाइगर जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इन कार्यक्रमों के तहत स्थानीय जनता को जागरूक किया जा रहा है कि वह कैसे वन्यजीवों से अपनी सुरक्षा करें। आबादी के आसपास बाघ या तेंदुआ दिखने पर वनकर्मियों को सूचित करें।
- डाॅ. धीरज पांडेय, निदेशक कॉर्बेट टाइगर रिजर्व
विश्व बाघ दिवस का कॉर्बेट में आयोजन बेहद हर्ष का विषय है। भारत में बाघों की आबादी पूरे विश्व के बाघों की संख्या का लगभग 70 प्रतिशत होना गौरव की बात है। कॉर्बेट का इसमें योगदान अहम है। इस टाइगर रिजर्व से बाघ परियोजना का शुभारंभ हुआ था। संख्या वृद्धि भी एक चुनौती है।
संजय छिमवाल, वन्यजीव विशेषज्ञ
बाघों की संख्या बढ़ने से पर्यटक काफी खुश हैं, क्योंकि कॉर्बेट में 10 वर्ष पहले बाघ दिखना बहुत मुश्किल होता था। परंतु कुछ सालों से यहां पर कुछ बाघ परिवार आराम से दिखने लगे हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध बाघिन पारो और उसकी तीन मादा शावक हैं। इसी तरह ढिकाला चौड़ की बाघिन और उसके तीन नर शावक हैं।
मुकेश यादव, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर
इस वर्ष कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस की मेजबानी कर रहा है। बाघ एवं पर्यावरण संरक्षण में कॉर्बेट का गौरवशाली इतिहास रहा है। बाघों की संख्या में भी इस पार्क को सर्वाधिक घनत्व बाघ क्षेत्र होने का गौरव प्राप्त है। मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। प्रदेश को नई उर्जा के साथ इस चुनौती को स्वीकार करना होगा।
एजी अंसारी, सदस्य टाइगर कान्सर्वेशन फाउंडेशन
ऐसा नहीं है कि टाइगर की संख्या केवल कॉर्बेट में ही बढ़ रही है, इससे सटे जंगलों व आस पास के इलाकों में भी टाइगर देखे जा रहे हैं। इनमें सीतावनी रिज़र्व फाॅरेस्ट, रामनगर-हल्द्वानी मार्ग और मालधन का इलाका शामिल है। विगत वर्षों में यहां अच्छी संख्या में टाइगर देखे गए हैं।
दीप रजवार, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर