नगर निगम की आर्थिक तंगी अब कई हद तक दूर हो जाएगी। निगम ने आमदनी बढ़ाने के लिए यूनिपोल के टेंडर कर दिए हैं। निगम बनने के बाद पहली बार यूनिपोल का टेंडर हुआ है। टेंडर 68 लाख में उठा है।
हल्द्वानी कुमाऊं का सबसे बड़ा बाजार है। बावजूद यहां 2011 से यूनिपोल के टेंडर नहीं हुए थे। लेकिन शहर होर्डिंग से पटा है। निगम प्रशासन को अवैध होर्डिंग से एक रुपये का आमदनी नहीं होती थी।
मेयर और नगर आयुक्त की पहल पर यूनिपोल के टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई। टेंडर के लिए निगम ने 21 लाख की राशि निर्धारित की थी। शनिवार टेंडर फार्म बिक्री की आखिरी तिथि तक कुल 18 फार्म बिके।
सोमवार अपराह्न तक टेंडर फार्म जमा हुए और निगम की कमेटी के समक्ष टेंडर खोले गए। टेंडर में 11 कारोबारियों ने हिस्सा लिया।
नगर आयुक्त हरबीर सिंह के मुताबिक सर्वाधिक रेट बरेली के कारोबारी पूरन चंद्र पाठक ने लगाए। पूरन चंद्र पाठक के नाम 68 लाख तीन हजार 350 रुपये में टेंडर हो गया।
जबकि दूसरे नंबर पर बरेली के ही राजीव तनेजा रहे। उन्होंने 57 लाख 55 हजार रुपये का टेंडर भरा। आदेश कुमार और किरण रस्तोगी के फार्म निरस्त हो गए।
अभी तक होर्डिंग और यूनिपोल नगर निगम कर्मियों की कमाई का बड़ा जरिया था। अवैध तरीके से शहर में होर्डिंग लगाने वाले कर्मचारियों की जेब गरम करते थे। टेंडर होने से अब कर्मचारियों की कमाई बंद हो जाएगी और निगम की शुरू होगी।
2011 से पहले तत्कालीन नगर पालिका को साढ़े तीन लाख रुपये यूनिपोल से सालाना कमाई होती थी। निगम बनने के बाद इसके टेंडर ही नहीं हुए। करीब कुछ महीने पहले निगम ने यूनिपोल के टेंडर मांगे, लेकिन दो ही कारोबारियों के इसमें शामिल होने से उसे रद्द किया गया।