ट्यूशन पढ़ने गए नौवीं के छात्र के अपहरण की सूचना से सोमवार को शहर में हड़कंप मच गया। छात्र ने खुद अपने दादा को मैसेज कर अपहरण की जानकारी दी। इसके बाद घर वाले कोतवाली पहुंच गए। पुलिस ने छात्र का मोबाइल सर्विलांस में लगाया तो उसकी लोकेशन हरिद्वार में मिली। देर रात देहरादून में छात्र ने अपने मामा को एक रेस्टोरेंट में होने की सूचना दी। तब जाकर परिजनों में राहत की सांस ली। ब्यूरो
घटनाक्रम सोमवार का है। कानिया निवासी कमल किशोर पांडेय का 14 साल का बेटा आदित्य ग्रेट मिशन स्कूल में नौवीं में पढ़ता है। वह ट्यूशन पढ़ने रोजाना रामनगर जाता है। सोमवार ढाई बजे वह ट्यूशन पढ़ने गया था। शाम छह बजे तक घर नहीं पहुंचा तो परिवार वाले परेशान हो गए। उन्होंने ट्यूशन पढ़ाने वाले को फोन किया तो पता चला कि वह वहां नहीं पहुंचा।
कुछ देर बाद आदित्य ने अपने दादा दिनेश चंद्र पांडेय के मोबाइल पर मैसेज भेजा कि मुझे बचा लो, ये लोग मुझे हल्द्वानी की तरफ लेेेे जा रहे हैं और अभी सोए हुए हैं। मैसेज के बाद घर में हड़कंप मच गया। इसकी सूचना परिजनों ने तुरंत कोतवाली में दी।
दिनेश चंद्र पांडेय ने पुलिस को बताया कि छात्र की मां तारा देवी स्कूल बैग में ही घर के कपडे़ और लंच बॉक्स रख स्कूल बस से भेज देती हैं। आदित्य तीन से चार बजे तक गणित की ट्यूशन पढ़ता है। वहीं खाना खाने और कपडे़ बदलने के बाद पांच से छह बजे विज्ञान की ट्यूशन पढ़ने जाता है और छह बजे घर लौटता है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दो दिन पहले बच्चों की आपस में लड़ाई हुई थी, जिसे निपटा भी दिया गया था। एसएसआई कविंद्र शर्मा ने बताया कि बच्चों ने आपस में एक फेक आईडी बना रखी थी, जिसमें यह शिक्षकों के लिए भी गाली-गलौच लिख दिया करते थे। अन्य छात्रों के परिजनों को भी बुलाकर जानकारी ली गई है।
इसके बाद पुलिस ने छात्र का मोबाइल सर्विलांस में लगा दिया। उसकी लोकेशन हरिद्वार मिलने पर पुलिस टीम रवाना हो गई। रात 12 बजे देहरादून की जोगीवाला चौकी की चीता मोबाइल टीम ने उसे पंत रेस्टोरेंट से बरामद कर लिया। इसके बाद उसके मामा भुवन तिवारी भी पहुंच गए।
बोलेरो सवार चार लोगों ने किया अपहरण
आदित्य ने पुलिस को जो कहानी सुनाई उसके अनुसार रामनगर से चार लोगों ने उसे बोलेरो में जबरन बैठा लिया था। इसके बाद उसे देहरादून में आईटीआई मोहमपुर के पास सड़क पर फेंक गए।
छात्र की कहानी में झोल ही झोल
छात्र ने जोगीवाला चौकी के दिनेश और संदीप कुमार को जो कहानी सुनाई उसमें झोल अधिक नजर आ रहे हैं। पुलिस भी इस बात को हजम नहीं कर पा रही है। पहला तो उसका मोबाइल खुला था। दूसरा यदि अपहरण हुआ होता तो फिरौती मांगी जाती। अपहरणकर्ताओं उसे सड़क किनारे क्यों छोड़ते। फिर यदि उसे सड़क पर फेंक भी गए थे तो उसने देहरादून में रह रहे मामा को फोन क्यों नहीं किया।