हल्द्वानी। नई शिक्षा नीति से शिक्षा का स्वरूप बदलने जा रहा है। वर्षों से चली आ रही शिक्षा पद्धति इस बार से बदल जाएगी। विद्यार्थी छह स्ट्रीमों के विषयों पर आधारित विषयों की शिक्षा ग्रहण करेंगे। अब तक तीन वर्ष में होने वाला बीए, बीएससी, बीकॉम अब चार वर्ष का होगा। एनईपी में तीन स्ट्रीम नई जोड़ दी गई हैं। इसमें भाषा, कौशल विकास प्रशिक्षण, सह पाठ्यक्रम के विषय शामिल हैं।
प्रदेश के महाविद्यालयों में सत्र 2022-23 से नई शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई होगी। कुमाऊं विवि ने इसका पाठ्यक्रम तैयार कर लिया है। प्रवेश के समय छात्र-छात्राओं को चार स्ट्रीमों में से अपने पसंदीदा विषय चुनने का मौका मिलेगा।
एक स्ट्रीम के दो विषय अनिवार्य रहेंगे, जिन्हें तीन वर्ष तक नहीं बदला जा सकेगा। कुल मिलाकर विद्यार्थियों को पहले सेमेस्टर के लिए छह विषयों का चुनाव करना होगा। इसमें कला, विज्ञान, कॉमर्स में से दो मुख्य विषयों के साथ अन्य स्ट्रीमों के विषय चुनने का मौका मिलेगा। साथ ही कौशल विकास पाठ्यक्रम और सह पाठ्यक्रम का एक-एक विषय अनिवार्य रहेगा।
सेमेस्टर आधारित होगी पूरी शिक्षा प्रणाली
नई शिक्षा नीति की शिक्षा प्रणाली सेमेस्टर आधारित होगी। स्नातक स्तर में आठ सेमेस्टर होंगे। दो सेमेस्टरों की पढ़ाई में विद्यार्थी को ग्रेजुएट सर्टिफिकेट डिप्लोमा, चौथे सेमेस्टर में डिप्लोमा, छठवें सेमेस्टर में डिग्री ग्रेजुएट और आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करने पर रिसर्च डिग्री सर्टिफिकेट की उपलब्धि मिलेगी। हर वर्ष की पढ़ाई का विद्यार्थियों को क्रेडिट मिलेगा।
स्नातक स्तर में होंगी ये छह स्ट्रीम
नई शिक्षा नीति में स्नातक की पढ़ाई चार वर्ष की होगी। यह पढ़ाई छह स्ट्रीमों के विषयों पर आधारित रहेगी। कला मानविकी, विज्ञान, कॉमर्स, भाषा, कौशल विकास पाठ्यक्रम, सह पाठ्यक्रम को इसमें शामिल किया गया है। इन छह स्ट्रीमों में से छात्र-छात्राओं को अपने पसंदीदा विषयों का चुनाव करने का मौका मिलेेगा।
कोट
प्रदेश के महाविद्यालयों में इस बार से नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षण कार्य होगा। एनईपी में विद्यार्थियों को अपने पसंदीदा विषय चुनने का मौका मिलेगा। इससे उनका सर्वांगीण विकास होगा। नई शिक्षा नीति हर प्रकार से लाभदायक है। महाविद्यालयों में इसे लागू कराने के लिए तैयारी कर ली गई है। - प्रो. आरएस भाकुनी, उपनिदेशक, उच्च शिक्षा।