बुधलाकोट निवासी आकाश बोरा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उनके ग्राम की वोटर लिस्ट में 82 बाहरी लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें अधिकतर ओडिशा और अन्य जगह के हैं। जब इसकी शिकायत उन्होंने एसडीएम से की तो उन्होंने एक जांच कमेटी गठित की। जांच कमेटी ने वोटर लिस्ट का अवलोकन कर पाया कि इसमें 18 लोग बाहर के है लेकिन अंतिम लिस्ट जारी होने के बाद भी चिह्नित 18 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाए गए। जनहित याचिका दायर करने के बाद उन्होंने ऐसे ही 30 अन्य की लिस्ट भी कोर्ट में पेश की। सुनवाई के दौरान आयोग की तरफ से कहा गया कि कुछ लोगों को चिह्नित किया गया है।
वोटर लिस्ट बनाते वक्त बीएलओ के ने घर-घर जाकर वोटरों को चिह्नित किया था। उसी आधार पर लिस्ट बनाई गई लेकिन कोर्ट ने आयोग से पूछा कि जब वोटर लिस्ट बनाई गई तो उस वक्त वोटरों का आधार कार्ड, वोटर आईडी या राशन कार्ड या स्थायी निवास से संबंधित दस्तावेज की जांच की। अगर की है तो उसका रिकॉर्ड पेश करें या मौखिक तौर पर नाम बताए जाने के आधार पर उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर दिया।