बागेश्वर स्थित कस्तूरा मृग अनुसंधान केंद्र सवालों में है। सेंट्रल जू अथारिटी आफ इंडिया ने जंगलात से कस्तूरा मृगों से निकाली गई बेशकीमती कस्तूरी और कस्तूरा मृगों का हिसाब मांगा था, जिसका जवाब आज तक नहीं मिला। इसके बाद वन विभाग ने मुख्यालय को गहन छानबीन कराने को पत्र लिखा है।
यूपी के समय कस्तूरा मृग अनुसंधान केंद्र बागेश्वर के महरोड़ी में 1978-79 में स्थापित किया गया। आयुष संस्था के अधीन यह ब्रीडिंग सेंटर चलाया जा रहा था। इस सेंटर का उद्देश्य कस्तूरी का इस्तेमाल यूनानी दवाओं समेत दूसरी चीजों में उपयोग के बारे में परीक्षण करना था।
यह प्रोेजेक्ट नब्बे के आखिरी दशक में खत्म हो गया। 1992 में सेंट्रल जू अथारिटी अस्तित्व में आया। नियमानुसार इसके तहत किसी भी वन्यजीव को ब्रीडिंग सेंटर, चिड़ियाघर आदि में रखने से पहले सीजेडए की अनुमति लेना आवश्यक था।
पर बताया जाता है कि इस सेंटर में जहां पर बेहद दुर्लभ और संकटग्रस्त कस्तृरा मृग को रखा जाता है, उसकी अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इसके बाद से सेंटर यूं ही चल रहा है। जब मामला प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव के पास पहुंचा तो उन्होंने नैनीताल वन प्रभाग (नैनीताल जू) को इसको टेकओवर करने का निर्देश दिया गया।
2015 में सेंट्रल जू अथारिटी आफ इंडिया के सदस्य सचिव (सीजेडए) और नैनीताल जू निदेशालय की की संयुक्त टीम ने अनुसंधान केंद्र का दौरा किया था। बताया जाता है की टीम ने कस्तूरा मृगों को जिन बाड़ों में रखा गया था, वह मानकों के हिसाब से सही नहीं माना था।
सीजेडए की टीम अनुसंधान केंद्र से अब तक कितने कस्तूरा मृगों को यहां पर रखा गया? कितने कस्तूरा मृग इस ब्रीडिंग सेंटर में पैदा हुए। कितने कस्तूरा मृग मरे? और उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट (नियमानुसार शेड्यूल वन के वन्यजीव के मरने के बाद पशुपालक डाक्टरों के पैनल और एसडीओ या उससे उच्च श्रेणी के अधिकारी के सामने पोस्टमार्टम होना चाहिए) के बारे में जानकारी मांगी।
कितने कस्तूरा मृगों की कस्तूरी निकाली गई? उन कस्तूरी का क्या हुआ। उसके बारे में भी पूछा। बताया जाता है कि अनुसंधान केंद्र वाले इन सवालों का जवाब नहीं दे सके हैं। इसके बाद नैनीताल वन प्रभाग और जू निदेशालय की टीम मुख्यालय को पत्र लिखा है।
बताया जाता है कि इसमें इन सवालों का जवाब न मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा मामले की गहन छानबीन कराने के बाद ही हस्तांतरण की कोई कार्रवाई करने को कहा गया है। इस बाबत अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव डीबीएस खाती का कहना है यह मामला उनकी जानकारी में आया है।
कस्तूरा मृग से जुड़े कई सवाल के जवाब सेंटर के अधिकारी दे नहीं सके हैं। इसमें मामले में वह खुद प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में जल्द ही दिल्ली में आयुष के उच्चाधिकारियों से भेंट करेंगे। आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।