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Nainital News: मां ने जान का खतरा बता बच्ची का मेडिकल कराने पर नहीं भरी हामी

Sun, 04 May 2025 02:28 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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हल्द्वानी। नैनीताल में दरिंदगी की शिकार हुई बच्ची के मामले में महिला डॉक्टर और काउंसलर ने बताया कि दुष्कर्म मामले में पुलिस का इंतजार नहीं किया जाता और न इस केस में किया गया है। पीड़िता के पहुंचने वाले दिन ही उसकी काउंसलिंग की गई । पीड़िता की मां का कहना था कि बेटी को जान का खतरा है और उन्होंने तत्काल मेडिकल कराने से मना किया था। कहा कि पति को पूछने के बाद इस पर फैसला लेंगे।
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महिला अस्पताल की डॉक्टर ने बताया 25 अप्रैल की दोपहर करीब पौने दो बजे ओपीडी का पर्चा लिए 12 वर्षीय बच्ची, मां, मौसी और नानी के साथ उनके पास अस्पताल पहुंची। मां ने आशंका जताई कि कि उनकी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है। यह भी बताया कि वे लोग नैनीताल से आए हैं और बीडी पांडे अस्पताल में रिश्तेदार होने के नाते वहां नहीं गए। मेरी बहन हल्द्वानी रहती है, इसलिए हम यहां आ गए और अब आपसे सलाह लेने आई हूं। डॉक्टर के अनुसार पीड़िता की मां ने बताया कि 12 अप्रैल को वारदात हुई थी। 23 अप्रैल को उनकी बड़ी बेटी ने फोन किया और यह कहकर बुलाया कि छोटी बहन के साथ कुछ गलत हुआ है। यहां आने के बाद से बेटी कुछ ठीक से नहीं बता रही है।



डॉक्टर के अनुसार मां ने बताया कि बच्ची को शुरुआत के दौरान (12 अप्रैल) को पेट में दर्द आदि चीजें हुई थी। डॉक्टर होने के नाते मैंने तुरंत बच्ची को प्राइवेट माहौल दिया और स्टाफ को बाहर निकाला। करीब आधे घंटे तक काउंसलिंग चली। पीड़ित बच्ची ने काउंसलिंग के दौरान बहुत कम जानकारी में बताया कि अंकल ने जंगल में ले जाकर उसके कपड़े खोलकर गलत काम किया और बाद में उसे 200 रुपये दिए। इस दौरान उसने गले पर चाकू भी रख दिया था और बोला कि किसी को बताया तो तेरा गला काट दूंगा। अस्पताल आने वाले दिन बच्ची कमजोर लग रही थी। आयरन और ताकत की दवा दी और बोला कि बेटा इसे सुबह और शाम पीना।
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मेडिकल के लिए स्वीकृति आवश्यक

महिला डॉक्टर के मुताबिक ओपीडी डॉक्टर मेडिको लीगल का केस नहीं कर सकती। मेडिकल आकस्मिक विभाग में होता है। माइनर बच्चे के मेडिकल के लिए मां-पिता की स्वीकृति आवश्यक होती है। महिला डॉक्टर ने बताया कि अगर बच्ची डरी है और माता पिता की स्वीकृति नहीं मिल रही है तो सीधे मेडिकल नहीं कराया जा सकता है। ऐसे कई केस आते हैं जिनमें परिजन या पीड़ित जान जाने का खतरा बताते हैं।

काउंसलिंग के बाद जब पीड़िता की मां को भी मेडिकल कराने को कहा तो उसने बताया कि अगर अभी पति को यह बताती हैं तो वह बेटी का सिर काटकर खेत में गाड़ देंगे। इसलिए मैं अब नैनीताल जा रही हूं और वहीं पर सलाह लेके तुरंत मेडिकल करा लूंगी। बालिका की सुरक्षा को देखते हुए मैंने पुलिस को तुरंत सूचना नहीं भेजी। नाजुक मामला था और बच्ची की काउंसलिंग चल रही थी तो मां उन्हें पर्चा देना भूल गई होगी।
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