गौला में जल्द खनन बंद होने जा रहा है। वन महकमे ने गौला में खनिज निकासी मात्रा तय करने वाली संस्था सेंट्रल स्वॉयल वाटर रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (सीएसडब्ल्यूआरटीआई) की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया है। इस संस्था ने पिछली बार की तुलना में करीब 11 लाख घनमीटर खनिज की निकासी की मात्रा कम निकालने की संस्तुति की थी।
भारत सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने गौला खनन में कई शर्त लगाई है। इसमें नदियों में कितना खनिज निकाला जाएगा, उसका वैज्ञानिक अध्ययन कराने को कहा है। इसी के तहत देहरादून की सीएसडब्ल्यूआरटीआई संस्था के वैज्ञानिक हर साल खनन शुरू होने और खनन बंद होने के बाद नदी क्षेत्र का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करते हैं। संस्था के वैज्ञानिकों ने करीब डेढ़ महीने पहले नदी क्षेत्र का अध्ययन किया।
इसमें पिछली बार 54 लाख 25 हजार घनमीटर खनिज निकासी की जगह इस सत्र में करीब 43 लाख 77 हजार तय कर दी है। इससे करीब 11 लाख घनमीटर अचानक कम हो गया। इसके चलते नदी में खनन जो कि मई के अंतिम सप्ताह तक चलने की संभावना थी, वह 22 अप्रैल तक सिमटने के आसार हो गए। नए लक्ष्य के हिसाब से केवल सात लाख घनमीटर खनिज ही बचा है। उप प्रभागीय वनाधिकारी गौला एनसी पंत कहते हैं कि नदी में 15 से 20 दिन तक और खनन हो पाएगा।