बागेश्वर में 270 फीसदी बढ़ा, अल्मोड़ा में करीब 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई। गढ़वाल के पर्वतीय जिले चमोली में दुग्ध संग्रह करीब 84 प्रतिशत और रुद्रप्रयाग में छह प्रतिशत बढ़ा। इसके विपरीत नई टिहरी में करीब 61 प्रतिशत, उत्तरकाशी में 31 और पौड़ी में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। राज्य में दैनिक औसत दुग्ध संग्रह में नैनीताल जिले का प्रदर्शन सबसे बेहतर है। यहां 35,943 किलोग्राम से बढ़कर 1,04,889 किलोग्राम पहुंच गया।
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जिलेवार दैनिक औसत दुग्ध संग्रह, मात्रा किग्रा में
जिला 2002-03 2024-25
नैनीताल 35,943 1,04,889
ऊधमसिंह नगर 39,356 41,441
अल्मोड़ा 8,089 11,705
बागेश्वर 310 1,148
पिथौरागढ़ 985 6,665
चम्पावत 2,479 14,683
देहरादून 4,136 9,995
हरिद्वार 2,141 11,666
उत्तरकाशी 1,243 863
नई टिहरी 1,885 744
पौड़ी 3,815 2,981
रुद्रप्रयाग 381 405
चमोली 1,092 2,014
नोट- यह आंकड़ा साल 2002 और 2025 का है। बीच के वर्ष में दुग्ध संग्रह में कमी और बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
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16 साल में बढ़ीं 512 दुग्ध समितियां
यूसीडीएफ के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2009-10 में प्रदेश में 2,259 कार्यात्मक दुग्ध समितियां थीं, जो 2024-25 में बढ़कर 2,771 हो गईं। यानी 16 साल में 512 समितियों की वृद्धि हुई। यह करीब 22.7 प्रतिशत का इजाफा है।
कोट :-
राज्य में भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार योजनाओं का संचालन किया जाता है। प्रदेश में दुग्ध संग्रह के स्तर में काफी सुधार आया है। गढ़वाल के टिहरी गढ़वाल में दुग्ध संग्रह में काफी कमी आयी है। इसके सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
-जयदीप अरोरा, प्रबंध निदेशक उत्तराखंड डेयरी फेडरेशन