हल्द्वानी। कुमाऊं में सहकारिता विभाग का धान खरीद का लक्ष्य पूरा होना छोटे किसानों को भारी पड़ रहा है। धान खरीद नहीं होने के चलते उन्हें बाजार में धान को कम दाम में ही बेचना पड़ रहा हैं। सरकारी क्रय केंद्रों में किसानों को धान के 2369 प्रति रुपये कुंटल के दाम मिल रहे थे। वहीं वर्तमान समय में बाजार में 2000 से 2100 प्रति कुंटल के रेट ही मिल रहे हैं जिससे किसान परेशान हैं।
सहकारिता विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी त्रिलोचन पाठक के अनुसार विभाग को धान खरीद के लिए 10 लाख कुंटल का लक्ष्य मिला था। इसे विभाग ने निधारित समय से पहले पूरा कर लिया। उनके मुताबिक 31 दिसंबर तक खरीद होनी थी जबकि 12 दिसंबर को लक्ष्य पूरा होने के चलते धान खरीद बंद कर दी गई थी। बताया कि सबसे अधिक ऊधमसिंह नगर ने 9 लाख कुंटल खरीद की, नैनीताल ने 85 हजार और बनबसा व टनकपुर ने मिलकर 15 हजार कुंटल धान की खरीदा।
इधर विभाग ने अपना लक्ष्य तो पूरा कर लिया लेकिन छोटे किसानों को निजी मिलों में धान को सरकारी से कम दाम में बेचकर नुकसान की मार झेलनी पड़ रही है। किसानों के मुताबिक मुनाफा तो दूर फसल की जुताई और खाद-पानी की भी लागत नहीं निकल सकी है।
रेट बढ़ाने से पूरा हुआ लक्ष्य
सहकारिता क्रय केंद्रों में इस बार धान का खरीद मूल्य बाजार मूल्य से ज्यादा था। इस कारण किसानों ने पहले ही धान खरीद केंद्रों में धान देना मुनासिब समझा। जबकि पिछली बार खरीद मूल्य, बाजार भाव से कम था।
केस 1 - सहकारी क्रय केंद्र बंद हो जाने से हमें निजी मिलों को अपनी फसल बहुत ही कम दामों में बेचनी पड़ रही है। बाजार में मिल रहे रेटों से नुकसान झेलना पड़ रहा है। सरकार को किसानों को घाटा न हो, इसके लिए अपना लक्ष्य बढ़ाना चाहिए। - आनंद सिंह मेहरा गौलापार, किसान
केस 2- सरकारी क्रय केंद्र अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए पहले बड़े काश्तकार का माल पहले लेते हैं। छोटे किसानों की बारी आने तक विभाग लक्ष्य पूरा हो गया, कहकर केंद्रों को बंद कर देता है। मजबूरी में निजी मिलों को अपनी फसल बेचनी पड़ती है। - एसएस जीना, बेरीपड़ाव, किसान
केस 3-
सरकार की नीति केवल बड़े काश्तकारों को लाभ देने की होती है। छोटे किसानों के पहुंचने तक तक विभाग का अपना लक्ष्य पूरा कर लेता है। इस कारण हमेशा फायदा कम, नुकसान अधिक झेलना पड़ता है। - स्नेहलता भंडारी, मोटाहल्दू
कोट- सरकार से मिले लक्ष्य को विभाग ने समय से पूरा कर लिया है। पुन: लक्ष्य मिलने पर ही क्रय केंद्रों को खोला जायेगा। जब तक कोई लक्ष्य नहीं मिलता केंद्रों को नहीं खोला जा सकता है। - त्रिलोचन पाठक, क्षेत्राधिकारी, खाद्य सहकारी विभाग