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एमबीपीजी कॉलेज चुनाव: प्रचार में दिखा जोश...वोटिंग में आई ठंडक, 12,800 छात्रों में से सिर्फ 4,063 ने डाले वोट

Tue, 29 Sep 2026 08:21 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी

सार

एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में मंगलवार को छात्रसंघ चुनाव हुए। प्रचार में छात्रों का खासा उत्साह दिखा, लेकिन मतदान में बेरुखी साफ नजर आई। 18 बूथों पर सुबह 9 बजे शुरू हुआ मतदान दोपहर 2 बजे तक मात्र 31.74% (4,063 वोट) ही पहुंच सका।
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एमबीपीजी कॉलेज में मतदान के दौरान सड़क पर जमा प्रत्याशियों के समर्थक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कुमाऊं के सबसे अधिक छात्र संख्या वाले महाविद्यालय एमबीपीजी कालेज हल्द्वानी में छात्रसंघ चुनाव प्रचार के प्रति छात्र-छात्राओं में खासा उत्साह नजर आया लेकिन मतदान के प्रतिशत ने चुनाव के प्रति जैन-जी की बेरूखी को दर्शा दिया। 12800 छात्र संख्या वाले इस महाविद्यालय में मंगलवार को वोट डालने के लिए मात्र 4063 मतदाता ही बूथों तक पहुंच सके। सुबह नौ बजे से मतदान प्रक्रिया शुरू हुई। पहले घंटे में मात्र 2.20 फीसदी ही वोट पड़े जबकि 11 बजे तक 5.86 फीसदी, 12 बजे तक 13.58 फीसदी, दोपहर 1 बजे तक 23.6 फीसदी और दो बजे तक कुल 31.74 फीसदी (4063) वोट डाले गए। कॉलेज में मतदान के लिए 18 बूथ बनाए गए थे। छात्रसंघ के 11 पदों के लिए 72 प्रत्याशी मैदान में थे।

मतदान शुरू होने के बाद नजर आने लगा त्रिकोणीय मुकाबला

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एमबीपीजी कॉलेज में मुख्य संघर्ष छात्रसंघ अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर नजर आया। इसमें मतदान शुरू होने के बाद से ही त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला। अध्यक्ष पद के तीनों दावेदार एबीवीपी के धीरज बिष्ट, एनएसयूआई के मेहुल साह और एबीवीपी के बागी और निर्दलीय आर्यन बेलवाल अपने समर्थकों के साथ परिसर के भीतर से लेकर बाहर तक माहौल बनाते रहे।

ड्रोन की नजर, जूते तक उतरवा लिए
छात्रसंघ चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस ने एमबीपीजी महाविद्यालय और इसके आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हुए थे। परिसर के बाहर से लेकर भीतर तक की प्रत्येक गतिविधि की रिकार्डिंग ड्रोन कैमरों से की जा रही थी। इसके अलावा मुख्य प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर के अलावा बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई थी। परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक छात्र-छात्रा व अन्य लोगों की चैकिंग की जा रही थी। यहां तक की एक गेट पर तो छात्रों से जूते भी उतरवाए गए। जूते उतारने के बाबत पूछे जाने पर एक पुलिस कर्मी ने बताया कि कुछ छात्र मोजे में मोबाइल फोन छुपाकर ले जा रहे थे, इसलिए जूते खुलवाने पड़ रहे हैं।

11 बजे बाद आई मतदान में तेजी

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एमबीपीजी कॉलेज के छात्रसंघ चुुनाव में मंगलवार को सुबह शुरुआती दो घंटे मतदान के लिहाज से धीमे रहे। इस दौरान मतदान का प्रतिशत छह फीसदी भी नहीं पहुंचा था और अधिकतर बूथों पर लाइनें गायब थीं, लेकिन 11 बजे बाद एकाएक मतदान करने आने वालों की संख्या में इजाफा होने लगा और अधिकतर बूथों पर मतदाताओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं। अलबत्ता सुबह नौ बजे प्रवेश के लिए बनाए गए दोनों गेटों पर लंबी कतार नजर आईं। बगैर आई कार्ड किसी को भी प्रवेश नहीं दिया गया। पहले घंटे में सिर्फ 282 वोट पड़े जिसमें छात्राओं की भागीदारी कम मात्र 1.5 फीसदी रही जबकि 11 बजे तक मतदान करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या 375-376 जा पहुंची थी। कुल 12800 मतदाताओं में लगभग 7650 छात्राएं हैं।

पर्यवेक्षक और मजिस्ट्रेट ने जांचीं व्यवस्थाएं
छात्रसंघ चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक व प्राधिकरण सचिव मनीष कुमार सिंह के नेतृत्व में सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी व तहसीलदार कुलदीप पांडे ने काॅलेज के भीतर बूथों का जायजा लिया। इसके अलावा एसपी क्राइम डा. जगदीश चंद्र, एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल, सीओ रविकांत सेमवाल आदि भी मतदान प्रक्रिया का जायजा लेते रहे। इस दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने प्राचार्य प्रो. एनएस बनकोटी के साथ चुनाव को लेकर बैठक की और जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

आधी आबादी ही रहेगी निर्णायक
छात्रसंघ चुनाव में इस बार छात्राओं के लिए आरक्षण लागू करने का एमबीपीजी महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं ने स्वागत किया है। एमबी महाविद्यालय में छात्राओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण तो लागू नहीं हुआ है लेकिन चुनाव में आधी आबादी ही निर्णायक रहेगी। यहां तीन पद छात्राओं के लिए आरक्षित हैं। इनमें उपाध्यक्ष छात्रा, संयुक्त सचिव छात्रा, कोषाध्यक्ष छात्रा शामिल हैं। मतदान के शुरू में छात्राओं की भागीदारी कम रही लेकिन दो घंटे के बाद यह बराबरी पर जा पहुंची थी। छात्रा आरक्षण के बाद प्रत्याशी मेनिफेस्टो में सैनिटरी पैड मशीन, गर्ल्स कॉमन रूम, छात्राओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाने जैसे वादे करते रहे। वर्ष 2019 में छात्राओं का वोट प्रतिशत 22 रहा जो इस बार बढ़कर 31 फीसदी तक जा पहुंचा है।

चुनाव में प्रत्याशियों की जुबान पर रहे ये शब्द
छात्रसंघ चुनाव के दौरान अधिकतर प्रत्याशियों ने परिवर्तन, छात्रहित, छात्राओं का सम्मान, छात्रावास सुविधा जैसे शब्दों को वोट का हथियार बनाया। उन्होंने कॉलेज की व्यवस्थाओं में परिवर्तन कराने, छात्र हित के लिए काम करने, छात्राओं का सम्मान करने और बाहर से यहां पढ़ाई के लिए आने वाले छात्र छात्राओं के लिए छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराने के वादे किए।

लिमिट 50 हजार की, खर्च की चर्चा 25-30 लाख
एमबीपीजी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में प्रत्याशियों की ओर से किया गया खर्च लोगों की जुबान पर चर्चा का विषय बना रहा। लिंगदोह कमेटी की सिफारिश के अनुरूप एक प्रत्याशी को पचास हजार रुपये तक प्रचार कार्य में खर्च करने थे, लेकिन यहां तो प्रत्याशियों ने 25 से 30 लाख तक खर्च कर डाले। यही नहीं लोग खर्च का हिसाब कुछ इस तरह से लगाते नजर आए। हालांकि अमर उजाला इसकी पुष्टि नहीं करता:-

फ्लेक्स/पोस्टर - 2000 पोस्टर x 15 रुपये = 30,000

फूल-माला - 500 x 50 = 25,000

गाड़ी+पेट्रोल - 15 गाड़ी x 2000 = 30,000

चाय-समोसा-पानी आदि - 4000 छात्र x 30 रुपये = 1.2 लाख

ढोल - 5 टीम x 5000 = 25,000

डीजे/सेलिब्रिटी पर खर्च- श्वेता मेहरा, प्रियंका महर, अमर संधू का शो - 3 से 5 लाख प्रति शो

सोशल मीडिया क्रिएटिव - 50,000

कुल अनुमान - 8-10 लाख प्रति अध्यक्ष प्रत्याशी, 3 प्रत्याशी = 25-30 लाख

एमबीपीजी में छात्रसंघ चुनाव का उत्साह, समस्याओं पर टिकी छात्राओं की उम्मीदें
कुमाऊं के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी कॉलेज में मंगलवार को छात्रसंघ चुनाव के मतदान को लेकर छात्र-छात्राओं में उत्साह रहा। सुबह से ही विद्यार्थी मतदान के लिए पहुंचते रहे। कॉलेज के 12,800 मतदाताओं के बीच चुनाव को लेकर उत्साह के साथ कॉलेज की समस्याओं पर भी चर्चा रही। सफाई, शौचालय, लाइब्रेरी, लैब, पर्याप्त फैकल्टी और सुरक्षा विद्यार्थियों के प्रमुख मुद्दे रहे। छात्राओं ने उम्मीद जताई कि नया छात्रसंघ इन समस्याओं को कॉलेज प्रशासन के सामने मजबूती से उठाएगा।

सफाई और शौचालयों की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। मतदान करते समय इन समस्याओं को ध्यान में रखा है। - ज्योति, छात्रा

लाइब्रेरी में सुविधाएं बढ़नी चाहिए ताकि पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल सके।- अदिति पाल, छात्रा

छात्राओं की सुरक्षा अहम मुद्दा है। छात्रसंघ को इसे प्राथमिकता से उठाना चाहिए। - मेघा जोशी, छात्रा

लैब में जरूरी संसाधन और बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए। मतदान में इस मुद्दे को भी ध्यान में रखा। - अक्षिता आर्या, छात्रा

पर्याप्त फैकल्टी और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं विद्यार्थियों की जरूरत हैं। नए छात्रसंघ से इन मुद्दों पर काम की उम्मीद है। - नंदिनी, छात्रा

छात्रसंघ चुनाव- पहली बार लोकतंत्र को करीब से देखने का अनुभव

अपने दोस्तों के साथ पहली बार छात्रसंघ चुनाव में वोट देने आई हूं। जगह-जगह प्रत्याशियों के समर्थक हाथ जोड़कर अपने उम्मीदवार के पक्ष में वोट की अपील कर रहे हैं। छात्रसंघ चुनाव के इस माहौल को पहली बार देखना मेरे लिए बिल्कुल नया और खास अनुभव है -आरती बिष्ट, बीए प्रथम वर्ष

कई दिनों से कॉलेज आ रही हूं, लेकिन नैनीताल रोड पर इतना शोरगुल और छात्र-छात्राओं की भीड़ पहली बार देख रही हूं। समर्थक बैनर लेकर अपने प्रत्याशी के पक्ष में वोट की अपील कर रहे हैं। हालांकि मैंने पहले ही तय कर लिया है कि किस प्रत्याशी को अपना वोट देना है। -जसमीत कौर, बीए प्रथम वर्ष

छात्रसंघ चुनाव को लेकर कॉलेज में काफी उत्साह है। दोस्तों के साथ पहली बार मतदान करने आई हूं। प्रत्याशियों के समर्थकों की अपील और कॉलेज के माहौल ने इस चुनाव को मेरे लिए खास बना रहा है। यह किसी भी तरह बड़े चुनावों से कम नहीं था। -आयुषी, बीए प्रथम वर्ष

इस बार पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा छात्राएं मतदान के लिए पहुंची हैं। हर बार की तरह प्रत्याशी अपने मुद्दों और वादों के साथ मैदान में हैं। कॉलेज की कई परेशानियां वर्षों से पूरी नहीं हो पाई हैं। चुनाव चाहे लोकतंत्र का हो या छात्रसंघ, योग्य व्यक्ति का चुनाव होना जरूरी है। -नीलम आर्या, एमए प्रथम वर्ष

छात्राओं को साधने की होड़, प्रवेश द्वार पर डटे प्रत्याशी
अध्यक्ष पद के प्रत्याशी छात्राओं को अपने पक्ष में करने में जुटे रहे। उनके साथ उपाध्यक्ष और सचिव पद के प्रत्याशी भी मौजूद थे। इससे प्रवेश द्वार पर लगातार भीड़ और चुनावी हलचल बनी रही। छात्राओं को प्रवेश में हो रही परेशानी को देखते हुए एसपी सिटी ने हस्तक्षेप किया, लेकिन पुलिस की चेतावनी भी बेअसर रही।

छात्रों को रुपये बांटने का आरोप लगाते हुए भिड़े समर्थक
छात्रसंघ चुनाव के दौरान मतदान के लिए पहुंच रहे छात्रों को रुपये बांटने के आरोप को लेकर एबीवीपी समर्थित प्रत्याशी धीरज बिष्ट और संगठन के बागी प्रत्याशी आर्यन बेलवाल के समर्थकों के बीच बहस हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराया। नैनीताल मुख्य मार्ग की ओर से छात्रों के प्रवेश के लिए बनाए गए गेट के पास यह विवाद हुआ। आर्यन बेलवाल के समर्थक दीपक सनवाल ने आरोप लगाया कि मतदान के लिए आ रहे छात्रों को रुपये बांटे जा रहे थे। वहीं, धीरज बिष्ट के समर्थकों ने इस आरोप को गलत बताया।

छात्रसंघ चुनाव का कारोबार पर असर
छात्रसंघ चुनाव के चलते नैनीताल रोड पर आवाजाही बंद होने से तिकोनिया से शहीद स्मारक तक कारोबार प्रभावित रहा। कॉलेज के आसपास खुले शोरूम और दुकानों के कर्मचारी ग्राहकों का इंतजार करते नजर आए। सुबह नौ बजे मतदान शुरू होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था के चलते मार्ग पर आवाजाही सीमित रही। इस दौरान क्षेत्र में केवल वाइन शॉप, पेट्रोल पंप और निजी चिकित्सालय खुले रहे। बाद में शोरूम और अन्य दुकानें भी खुलीं, लेकिन सड़क बंद होने और कॉलेज के आसपास छात्र-छात्राओं की भीड़ के चलते कारोबार पर असर पड़ा।

दोपहर दो बजे मतदान समाप्त होने के बाद भी चुनावी गतिविधियों के चलते क्षेत्र में हलचल बनी रही। इसके बाद कुछ शोरूम कर्मचारियों ने शटर डाउन कर दिए। कारोबारियों का कहना था कि पूरे दिन ग्राहक नहीं पहुंचने से बिक्री प्रभावित रही।

लोकतंत्र का शोर, सुकून की छांव
छात्रसंघ चुनाव के दौरान नैनीताल रोड पर वाहनों का शोर थमा रहा लेकिन छात्रों की आवाजें गूंजती रहीं। शहीद स्मारक के पास पेड़ की छांव में अपने रिक्शे पर आराम करता दिव्यांग युवक लोकतंत्र के इस शोर से अलग सुकून के पल बिताता नजर आया।

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