एमबीपीजी कालेज के समाज शास्त्र विभाग की ओर से आयोजित अखिल भारतीय सेमिनार में दूसरे दिन तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता रोहतक विश्वविद्यालय के प्रो. वीके नागला ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उपाधियां बढ़ रही हैं गुणवत्ता नहीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान उच्चशिक्षा नीति में कुछ परिवर्तन कर इसे गुणवत्ता पूर्ण बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि उच्चशिक्षा में व्यापक सुधार आ सके।
सेमिनार के समापन सत्र के मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज शास्त्री प्रो. सुकांत चौधरी ने युवाओं से अपील की कि अतीत के गुणगान से बचो, अपने मन को मत मारो, नयी तकनीक का जमकर इस्तेमाल करो। विश्वविद्यालयों और कालेजों में सीमित प्रवेश उच्च गुणवत्ता का मानक अपनाए जाने की जरूरत है। उत्तराखंड के विकास के लिए हिमाचल पैटर्न को अपनाने की जरूरत है।
पहाड़ में राजधानी बनाते हुए नीति और नीयत दोनों ठीक करनी पड़ेगी। अध्यक्षता करते हुए प्रो. एसबी सिंह ने सभी विचारों पर अपनी टिप्पणी करते हुए अपनी बात रखी कि जितना व्यक्तिगत नैतिकता कम होती जाएगी उतनी ही सरकार की मुंह तकाई करनी पड़ेगी।
इसलिए डिग्रीधारी नहीं आदमी बनाइए। प्रो. विनय विद्यालंकार ने पर्वतीय क्षेत्र में काम करते हुए मिले अनुभव के आधार पर लोगों से आग्रह किया कि वे जीवन को भूलकर सिर्फ आजीविका के लिए प्रयासरत नहीं रहें।
एकेडमिक स्टॉफ कालेज के निदेशक प्रो. बीएल साह ने कहा कि अध्यापक वही है जिसमें छात्र मित्रवत हो, खुश हो इसलिए हमारी प्रवृत्ति में सकारात्मक परिवर्तन कैसे हो यह बड़ा सवाल है। आपदा प्रबंधन के विषय विशेषज्ञ प्रो. आरके पांडे ने कहा कि पढ़ाई मांग आधारित नहीं बल्कि पूर्ति आधारित है।
हम नेट- सेट बनाएंगे या नागरिक यह सोचनीय है। नैक ग्रेडिंग के लिए छल छद्म का सहारा ले रहे हैं। उच्चशिक्षा के पूर्व संयुक्त निदेशक प्रो. बीएस बिष्ट ने उच्चशिक्षा में गुणात्मक सुधार के आवश्यक कदम उठाए जाने पर जोर दिया। सेमिनार में डा. कमल पांडे, डा. एएस उनियाल, बादशाहीथौल के प्रो. केपी सिंह, चंपावत डिग्री कालेज के प्राचार्य प्रो. सीडी सूंठा, कुमाऊं विवि के प्रो. भगवान सिंह बिष्ट ने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एमसी पांडे ने की व संचालन डा. संतोष मिश्र ने किया। समापन के अवसर पर आयोजक सचिव प्रो. एपी सिंह ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेमीनार के निष्कर्ष पर्वतीय क्षेत्र की उच्चशिक्षा को नई दिशा देने में सहायक साबित होगा। इस दौरान प्रो. एलपी वर्मा, डा. संजीव सक्सेना, डा. हेमंत शुक्ला, डा. संतोष कुमार, डा. आरएस भाकुनी, डा. अशोक कुमार, केडी परगाई, रवींद्र सैनी आदि शोधार्थी मौजूद रहे।