राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के उपाध्यक्ष/दर्जा मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश को उपमुख्यमंत्री बनाने का राग अलाप कर सरकार को असहज कर दिया है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत से घोषणाओं को अमली जामा पहनाने के लिए इसे आवश्यक बताया है। प्रताप की मांग से सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। रविवार को एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री से कालेज खोलने की घोषणाएं न करने को कहा था। डा. हृदयेश के बयान ने भी सरकार की पेशानी पर बल डाल दिया था।
प्रताप ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को दिए पत्र में कहा कि घोषणाओं को पूरा करने के लिए तेज तरार और वरिष्ठ काबीना मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश को उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय भी डा. हृदयेश के पास होना चाहिए।
मुख्यमंत्री रावत को धरती पुत्र और पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के बाद विकास पुरुष बताते हुए कहा कि राज्य हित में कई घोषणाएं हो चुकी हैं। डा. हृदयेश का ब्यूरोक्रेसी भी सम्मान करती है और घोषणाओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है। 2016 में की गई घोषणाएं अगर हवा में रही तो पार्टी को 2017 में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
प्रताप ने कहा कि मुख्यमंत्री ने रिकार्ड तोड़ काम किए हैं। उनके नेतृत्व में 2017 में कांग्रेस प्रचंड बहुमत से सत्ता में लौटेगी। उन्होंने गैरसैंण में आरक्षण बिल पास करने को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी है और सबको अपनी बात रखने का अधिकार है।
वित्त मंत्री को उपमुख्यमंत्री बनाने की बात उनकी निजी राय है। कहा कि नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत के नेतृत्व में विपक्ष दिशाहीन हो चुका है। भाजपा 2017 में हाथ मलकर रह जाएगी।
प्रताप ने नया राग अलाप कर सर्दी के मौसम में सियासी पारा जरूर गर्मा दिया है। प्रताप भले इसे निजी राय बता रहे हों मगर सियासी गलियारों में इसके राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि प्रताप पार्टी में अलग बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं।