कुमाउंनी के वरिष्ठ कवि मथुरा दत्त मठपाल को कोयंबटूर (तमिलनाडू) में हुए सम्मान समारोह में साहित्य अकादमी द्वारा भाषा सम्मान से नवाजा गया।
16 अगस्त को हिंदी अकादमी उपाध्यक्ष चंद्रशेखर कांबार ने ताम्रपत्र, शॉल और पचास हजार रुपये की नगद धनराशि प्रदान की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध तमिल लेखक सिरपी बाल सुब्राह्मनयम रहे। कुमाउंनी भाषा के लिये श्री मठपाल के साथ चारू चंद्र पांडे को भी संयुक्ता रूप से सम्मानित किया गया, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण वे कार्यक्रम में नही पहुंच सके। कुमाउंनी भाषा में कार्य के लिये पहली बार यह सम्मान प्रदान किया गया है।
भाषा सम्मान से सम्मानित पंपापुरी रामनगर निवासी मथुरादत्त मठपाल ने लगभग तीन हजार किलोमीटर दूर दक्षिण भारत के प्रमुख शहर कोयंबटूर में अपना वक्तव्य कुमाउंनी में दिया।
उन्होंने कुमांऊनी की विशेषताओं पर प्रकाश डाला और कुमाउंनी साहित्य के दो सौ साल की लिखित परंपरा की जानकारी दी। वक्तव्य का अकादमी द्वारा हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद किया गया।
वक्तव्य का अंत कुमाऊं में त्यौहारों के अवसर पर दी जाने वाली मंगलकामना जीते रहो, जागते रहो, सिंह के भांति ऊर्जावान रहो, सियार की भांति चतुर रहो, मरने तक माता-पिता को याद करना, दूब की भांति पनपना, धरती के बराबर चौड़े हो जाना, आकाश के बराबर ऊंचे, तिष्ठना पनपना से किया।