हल्द्वानी। मणिपुर में उग्रवादियों के हमले में बलिदान हुए 40 असम राइफल्स के वारंट अधिकारी बलवंत सिंह खेतवाल को बृहस्पतिवार को हल्द्वानी के चित्रशिला घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। बारिश के बीच उमड़े जनसैलाब ने नम आंखों से वीर सपूत को विदा किया। रानीबाग से लेकर अंतिम संस्कार स्थल तक भारत माता की जय और बलवंत सिंह अमर रहे के नारों से वातावरण गूंजता रहा। असम राइफल्स का तीन सदस्यीय दल बृहस्पतिवार सुबह 5:20 बजे बलिदानी बलवंत सिंह की पार्थिव देह लेकर लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के मोतीनगर स्थित जगदंबा कॉलोनी स्थित उनके आवास पर पहुंचा। पत्नी संगीता देवी, बेटा रोहन और बेटियां दिव्या व चंदा शव देख बिलख पड़े। उनका विलाप देख मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
सवा आठ बजे उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। बारिश के बीच अंतिम यात्रा गौलापार बाईपास से नरीमन होते हुए रानीबाग पहुंची। चित्रशिला घाट पर जवानों ने कई राउंड फायरिंग कर उन्हें सलामी दी। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किए। हल्द्वानी छावनी के सैन्य अधिकारियों ने भी बलिदानी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद 10:20 बजे इकलौते बेटे रोहन ने बलवंत सिंह को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में एडीएम विवेक राय, सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी, एसडीएम रेखा कोहली, मोनिका समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
जल्द होने वाला था प्रमोशन
शहीद बलवंत सिंह खेतवाल वर्ष 1991 में असम राइफल्स में भर्ती हुए थे। उन्होंने सिपाही के पद से अपनी सेवा शुरू की थी। सरल और मिलनसार स्वभाव के कारण वह सभी के बीच लोकप्रिय थे। मूल रूप से बागेश्वर जिले के रहने वाले बलवंत सिंह के माता-पिता का निधन पहले ही हो चुका था। बलिदानी का पार्थिव शरीर लेकर आए साथियों ने बताया कि बलवंत सिंह खेतवाल का जल्द ही प्रमोशन होने वाला था।
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बागेश्वर से भी पहुंचे लोग
बलवंत सिंह की अंतिम यात्रा में बागेश्वर से लेकर हल्द्वानी तक लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। छह भाइयों में सबसे छोटे बलवंत ने नौकरी के दौरान करीब 10 वर्ष पहले मोतीनगर में अपना घर बनाया था। उनके परिवार में पत्नी संगीता खेतवाल, दो बेटियां और एक बेटा है। करीब चार वर्ष पहले उनकी बड़ी बेटी का विवाह हुआ था। छोटी बेटी देहरादून में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है जबकि बेटा अपनी बड़ी बहन के साथ अंबाला में रहकर आर्मी स्कूल में कक्षा 10 में अध्ययनरत है।
घात लगाकर बैठे उग्रवादियों ने किया था हमला
असम राइफल्स के जवानों ने चित्रशिला घाट पर घटना की जानकारी दी। मणिपुर से पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे नायब सूबेदार दर्शन सिंह नेगी, हवलदार खुशाल पांडा और केएस राणा ने बताया कि छह जुलाई को फोर्स का काफिला स्टोर से सामान लेकर लौट रहा था। नंगशोंग गांव के पास जंगल क्षेत्र में घात लगाए बैठे करीब 15 से 20 उग्रवादियों ने काफिले पर हमला कर दिया। उन्होंने बताया कि काफिले में तीन वाहन एक साथ चल रहे थे। सबसे आगे चल रहे वाहन में वारंट अधिकारी बलवंत सिंह खेतवाल और चालक मौजूद थे। हमलावरों ने पहले आईईडी विस्फोट किया और इसके बाद एलएमजी से लगातार फायरिंग शुरू कर दी। हमले के बाद क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
महिलाओं ने पुष्प अर्पित किए, युवाओं ने लगाए नारे
हल्दूचौड़। बलिदानी की अंतिम दर्शन के लिए सड़क के दोनों ओर लोग हाथ जोड़े खड़े दिखे। महिलाओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा की जबकि युवाओं और बच्चों ने हाथों में तिरंगा लेकर शहीद को श्रद्धांजलि दी। बलिदानी को पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, सांसद अजय भट्ट, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल, पूर्व विधायक नवीन दुम्का, प्रधान विपिन जोशी, हेमवती नंदन दुर्गापाल, कमलेश चंदोला आदि श्रद्धांजलि देने पहुंचे।