उच्चशिक्षा निदेशालय ने डीपीसी होने के बाद रिक्त पदों पर तैनाती के लिए प्राचार्यों की सूची तैयार कर शासन को भेज दी है। शासन की सहमति के बाद अब सिर्फ उच्चशिक्षा मंत्री की हरी झंडी मिलने का इंतजार है।
उच्चशिक्षा विभाग की ओर से संचालित करीब 45 राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इन पदों पर तैनाती डीपीसी न होने के कारण नहीं हो पा रही थी। इस मुद्दे को उच्चशिक्षा मंत्री ने गंभीरता से लिया तो उच्चशिक्षा विभाग और शासन हरकत में आया।
पिछले महीने 13 अप्रैल को देहरादून में डीपीसी हो सकी। इसमें ज्येष्ठता और श्रेष्ठता का मानदंड अपनाया गया और डिग्री कॉलेजों के 12 वरिष्ठतम प्राचार्यों को पीजी स्तर के कालेजों के प्राचार्य पद के लिए प्रोन्नति दी गई। करीब 34 वरिष्ठतम प्राध्यापकों को डिग्री कॉलेज के प्राचार्य पद के लिए प्रोन्नति दी गई है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक उच्चशिक्षा निदेशालय ने प्राचार्यों की प्रस्तावित तैनाती की सूची तैयार कर शासन को भेज दी है, शासन से भी इस सूची को ओके कर दिया गया है। वहीं, प्राचार्यों की तैनाती में देरी होने में प्रमुख कारण उच्चशिक्षामंत्री के कुमाऊं दौरे पर रहना बताया जा रहा है।
अब विधानसभा सत्र की वजह से कुछ नहीं हो पा रहा है। सूत्रों की मानें तो अभी प्राचार्यों की सूची फाइनल होने में एक सप्ताह का समय लग सकता है। दूसरी ओर भाजपा में पकड़ रखने वाले कुछ प्राचार्या अपनी पसंद के कालेज में तैनाती के लिए सिफारिश में जुटे हैं, सबसे अधिक लोग तो कुमाऊं के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी कालेज के लिए लाइन में हैं।
डीपीसी के बाद प्राचार्यों की सूची तैयार कर शासन को भेज दी गई है। प्राचार्यों की तैनाती के आदेश भी शासन स्तर से ही होने हैं। फाइल पर अभी उच्चशिक्षा मंत्री का अनुमोदन मिलना बाकी है।
- डॉ. बीसी मेलकानी, उच्चशिक्षा निदेशक