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अब मिला इंसाफ: 15 दिसंबर 2019 का वो दिन, जब दिनदहाड़े हुए हत्याकांड से दहल गया था हल्द्वानी, पढ़ें पूरी कहानी

Sat, 11 Nov 2023 12:20 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

अदालत ने हल्द्वानी के चर्चित भूपेंद्र पांडे उर्फ भुप्पी हत्याकांड (bhuppi murder case) के दोषी गौरव गुप्ता और सौरभ गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई। दो लाख एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। 
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हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह की अदालत ने हल्द्वानी के चर्चित भूपेंद्र पांडे उर्फ भुप्पी हत्याकांड (bhuppi murder case) के दोषी गौरव गुप्ता और सौरभ गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई। दो लाख एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन-तीन वर्ष की अतिरिक्त कैद भोगनी होगा।
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पढ़ें पूरी हत्याकांड की कहानी
शहर के बीच और सबसे व्यस्त सिंधी चौराहे पर 2019 को हुए चर्चित भूपेंद्र पांडे हत्याकांड के हत्यारों को कोर्ट ने जब सजा सुनाई तो पत्नी विनीता पांडे की आंखे नम हो गईं। विनीता ने सुबुकते हुए कहा कि आज पति की आत्मा को मोक्ष मिल गया। पति के हत्यारों के खिलाफ तहरीर देकर विनीता ने जो कानूनी लड़ाई शुरू की थी उसे अंजाम तक उनके बेटे ऋतिक ने पहुंचाया।

बेटे ऋतिक पांडे का कहना है कि आज दोनों हत्यारों को सजा के फैसले से काफी सुकून मिला है। इन लोगों ने 19 साल की उम्र में ही पिता का साया मेरे सिर से छीन लिया था। न्याय व्यवस्था से पूरी उम्मीद थी, इसी कारण चार साल तक लड़ाई लड़ी। आज उनकी लड़ाई अंजाम तक पहुंची और पिता के हत्यारों को उनके किए की सजा मिली। ऋतिक ने कहा कि कोविड के कारण न्याय में देरी हुई अन्यथा फैसला पहले ही आ जाता। डिजीसी एसके शर्मा ने रिपोर्ट अच्छी बनाई थी और जिला जज एवं सत्र न्यायधीश सुजाता सिंह की अदालत से उन्हें त्वरित न्याय मिला है।
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ऋतिक ने पिता को याद करते हुए बमुश्किल आंसू संभाले और कहा कि मेरे पिता को बीच चौराहे पर गोली, चाकू मारा और ईट पत्थर से कुचला गया। पिता तो वापस नहीं आ सकते लेकिन ऐसे जघन्य अपराधी को सजा मिलना जरूरी थी।

दिल पर पत्थर रख संभाला परिवार 
भूपेंद्र  पांडे की हत्या के बाद परिवार में उनकी पत्नी विनीता पांडे, बेटा ऋतिक और बेटी ऋचा ही रह गए थे। पिता की हत्या के समय 19 वर्ष के ऋतिक ने अपने गम को सीने में दबाकर घर की बागडोर संभाली और मां और बहन को हौसला भी दिया। वर्तमान में ऋतिक ग्राफिक एरा देहरादून से एमबीए कर रहा है। साथ ही प्रॉपर्टी और हार्डवेयर का काम भी करता है। ऋतिक का कहना है कि पिता की हत्या के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया था। अभी तक परिवार दुख की घड़ी से उबरा नहीं है। 
 
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मुकदमा वापस लेने का बना रहे थे दबाव
हत्या का मुकदमा दर्ज होनेे के बाद हत्यारों की ओर से वादी पक्ष पर मुकदमा वापस लेने का दबाव भी बनाया गया था। हालांकि मां और बेटे इन धमकियों से नहीं डरे और इंसाफ की लड़ाई लड़ते रहे। पता ये भी चला है कि भुप्पी और सागर ने दोनों भाइयों की ओर से मिले चेक के बाउंस होने पर केस दर्ज किया था। इसी बात से दोनों भाई नाराज थे और इन दोनों पर भी केस वापस लेने का दबाव बना रहे थे। घटना से पहले अभियुक्तों ने लेन-देन के मामले में भूपेंद्र पांडे को पांच लाख का चेक और गवाह दिनेश सागर को भी चेक दिए थे। अभियुक्तों के दिए गए चेक बाउंस हो गए थे, जिस पर भूपेंद्र पांडे और दिनेश सागर ने न्यायिक मजिस्ट्रेट हल्द्वानी में वाद दायर किया था। 

इस पर गुप्ता बंधू दिनेश को जानमाल की धमकी देकर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित करते आ रहे थे। मामले में साक्षी दिनेश ने 28 अक्तूबर 2019 को थाना हल्द्वानी में अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 420, 504 और एससीएसटी एक्ट के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसकी विवेचना चल रही थी। अभियुक्त दिनेश सागर से मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बना रहे थे। मना करने पर अभियुक्तों ने अपनी दुकान सिंधी चौराहे के पास घात लगाकर दिनेश को मारने का प्रयास किया। दिनेश को बचाने की कोशिश भूपेंद्र ने की तो अभियुक्तों ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल और भूपेंद्र पांडे की लाइसेंसी पिस्टल लूटकर उनके ऊपर गोलियां चला दी थी। 

सीसीटीवी बना अहम सबूत 
हत्याकांड का पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ था। घटना के फुटेज न्यायालय में सबूत के तौर पर पेश किए गए। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने सीसीटीवी की फुटेज से यह भी साबित किया कि जिन कपड़ों को पहन कर अभियुक्तों ने वारदात को अंजाम दिया था, उन्हीं कपड़ों में अभियुक्त गिरफ्तार भी किए गए थे।  विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट से भी यह साबित हुआ कि अभियुक्तों के पास से जो लाईसेंसी पिस्टल बरामद हुई थी उसी से चली गोली के टुकड़े भूप्पी के पोस्टमार्टम के दौरान उनके शव से बरामद हुए थे। अभियोजन ने घटना को चश्मदीद साक्षी, सीसीटीवी कैमरे की फुटेज, केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला की बैलेस्टिक रिपोर्ट और अभियुक्तगणों की गिरफ्तार व बरामदगी इत्यादि, महत्वपूर्ण साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्तों को दोषसिद्ध किया।

 
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